हितधारकों से बातचीत शुरू, प्रशासन का दावा- चंडीगढ़ के मौजूदा चिकित्सा संस्थानों का भार होगा कम
सिर्फ मरीजों का इलाज ही नहीं, मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च में भी होगा काम, बड़ी कंपनियों को किया जाएगा आमंत्रित
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। शहर में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। चंडीगढ़ प्रशासन ने नीति आयोग के सहयोग से एक रीजनल मेडिकल हब विकसित करने की योजना बनाई है। इसके लिए हितधारकों से बातचीत शुरू कर दी गई है। दावा है कि यह हब न केवल मरीजों के इलाज की सुविधा देगा, बल्कि मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इसके तहत देश-विदेश की बड़ी कंपनियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हाल ही में हुई नीति आयोग की बैठक में भी इसका जिक्र हुआ है। चर्चा हुई कि प्रशासन ने नीति आयोग के सहयोग से एक रीजनल मेडिकल हब विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इसमें हितधारकों से संवाद की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जल्द पूरा किया जा सके। इस प्रस्तावित मेडिकल हब की विशेषता यह होगी कि यह न केवल चिकित्सा सेवाएं प्रदान करेगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी योगदान देगा। इससे न सिर्फ चंडीगढ़ के मौजूदा चिकित्सा संस्थानों पर भार कम होगा, बल्कि देशभर से आने वाले मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया का मानना है कि यह हब चंडीगढ़ को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी बना सकता है।
2047 तक केयरिंग सिटी बनाने का लक्ष्य
चंडीगढ़ जिसे मूल रूप से 5 लाख की आबादी के लिए डिजाइन किया गया था, आज 12.43 लाख की जनसंख्या का घर है। इसके अलावा पड़ोसी राज्यों से भी काफी मरीज पीजीआई और चंडीगढ़ के अन्य अस्पतालों में इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। प्रशासन की कई बैठकों में स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ रहे दबाव को कम करने को लेकर चर्चा होती है। अब तक कई योजनाएं भी नहीं लेकिन अब तक कोई ठोक असर नहीं देखने को मिला है। हालांकि, प्रशासन को लगता है कि रीजनल मेडिकल हब बनने से कई निजी कंपनियां भी निवेश करेंगे। इससे रोजगार भी पैदा होंगे और पीजीआई पर दबाव भी कम होगा। प्रशासन ने 2047 तक सिटी ब्यूटीफुल के साथ चंडीगढ़ को केयरिंग सिटी बनाने का भी लक्ष्य रखा है।
एजु सिटी प्रोजेक्ट के लिए भी आईआईटी-आईआईएम से बातचीत
चंडीगढ़ में लंबे समय से अटके एजुकेशन सिटी प्रोजेक्ट को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें चल रही हैं। सारंगपुर में करीब 150 एकड़ की जमीन पर यूटी प्रशासन ने वर्ष 2006 में एजुकेशन सिटी बनाने की योजना बनाई थी। तमाम कोशिशों के बाद अब तक वहां सिर्फ निम्स ही स्थापित हो पाया है लेकिन अभी भी काफी जमीन खाली है। कुछ महीने पहले उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यूजीसी के साथ एक बैठक की थी। चार मॉडल पर चर्चा हुई थी। इसके अनुसार विदेशी यूनिवर्सिटी के कैंपस को आमंत्रित किया जाएगा। एजु सिटी में अपना कैंपस खोलने के लिए आईआईटी रोपड़ और आईआईएम अमृतसर ने भी रुचि दिखाई है। आईआईटी रोपड़ को 8 एकड़ जमीन देने के लिए वर्ष 2023 में प्रशासन ने मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई। इसके अलावा किसी यूनिवर्सिटी व कॉलेज के एक्सटेंशन, एक्सचेंज प्रोग्राम पर भी काम किया जा रहा है।