शिकायतकर्ता विनोद कुमार निवासी जीरकपुर ने सुनवाई के दौरान बताया कि वह इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) के रजिस्टर्ड कस्टमर थे। उसके पास एक्स्ट्रा पावर-फ्लीट कार्ड था। उसे 27 नवंबर 2021 को दूसरे ट्रांसपोर्टर से एक कंसाइनमेंट मिली थी, जिसे उसने 36 घंटे में महाराष्ट्र के रायगढ़ में पहुंचाना था। 27 नवंबर को रात करीब पौने दस बजे उसका ट्रक सिटको पेट्रोल पंप पर पहुंचा, जहां उसने 44 हजार रुपये में 540 लीटर डीजल भरवाया था। पंप के कर्मियों ने नेटवर्क इश्यू का कारण बताकर कार्ड से पेमेंट लेने से मना कर दिया और यूपीआई या कैश पेमेंट की मांग की। इसके बाद उसने अपने दोस्त से ऑनलाइन पेमेंट करवाई और साढ़े 12 बजे जाकर पंप कर्मियों को पेमेंट की। इस पूरे मामले में ट्रांसपोर्टर को चार से पांच घंटे का समय बर्बाद हुआ। इससे परेशान होकर शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने पाया कि सिटको पंप और सिटको के एमडी की ओर से मामले में सेवाओं में कोताही बरती गई। यह गलत व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा था। इस पर आयोग ने सिटको को 10 हजार रुपये हर्जाना भरने का आदेश दिया।