बैंकों के इनकार करने के बाद अब नगर निगम पब्लिक टायलेट की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनियों को देगा। 137 पब्लिक टायलेट संचालन के लिए बिड सोमवार को खोली जाएगी।
शहर में कुल 240 पब्लिक टायलेट हैं।
इन टायलेट को रखरखाव के लिए पहले रेजिडेंट्स और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशनों को देने की योजना बनाई गई थी जो सिरे नहीं चढ़ पाई। इसके पश्चात कुछ बैंकों को शहर के पब्लिक टायलेट के रखरखाव करने के लिए तैयार कर लिया गया था। इसके लिए नगर निगम को कोई शुल्क भी अदा नहीं करना था। लेकिन बाद में बैंकों ने प्रस्ताव से हाथ खींच लिया। जब से नगर निगम ने सेलवेल कंपनी से पब्लिक टायलेट वापस लिए हैं तब से इनको रखरखाव के लिए देने की योजना सिरे नहीं चढ़ी है।
एक टायलेट का खर्च 14 हजार रुपये नई बिड में नगर निगम ने एक पब्लिक टायलेट के रखरखाव के लिए 14 हजार रुपये देना तय किया है, जबकि पहले साढ़े 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। अब नगर निगम टायलेट के बाहर विज्ञापन लगाने की मंजूरी नहीं दे रहा है। यहां पर विज्ञापन से होने वाली कमाई नगर निगम अपने पास ही रखेगा।
सेलवेल कंपनी पर निगम लगा चुका है प्रतिबंध सेलवेल कंपनी पर नगर निगम प्रतिबंध लगा चुका है। कंपनी दो साल तक शहर में किसी भी ठेके के लिए टेंडर में शामिल नहीं हो सकती। मालूम हो कि सेलवेल कंपनी को दिए गए पब्लिक टॉयलेट्स का मामला पिछले 4 साल से विवाद में हैं। अब यह मामला पीएम कार्यालय तक भी पहुंच गया है जिस पर प्रशासन को जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम के अनुसार एक तो कंपनी ने बार बार नोटिस जारी करने के बाद 9 करोड़ से ज्यादा का विज्ञापन शुल्क जमा नहीं करवाया है और दूसरा जो पब्लिक टायलेट कंपनी ने नगर निगम को वापस दिए है तो वह उस स्थिति में नहीं है जिस स्थिति में कंपनी को चलाने के लिए अलाट किए गए थे।
साल 2006 से लेकर 2012 तक अलाट किए थे पब्लिक टॉयलेट नगर निगम के अनुसार साल 2006 से लेकर 2012 तक कंपनी को एक बार 84 और दूसरी बार 46 पब्लिक टॉयलेट्स को चलाने के लिए दिए। हर टॉयलेट्स ब्लाक के बाहर विज्ञापन लगाने के लिए खाली जगह भी छोड़ी गई थी यह विज्ञापन शुल्क कंपनी को नगर निगम को जमा करवाना था लेकिन कंपनी से ऐसा नहीं किया। नवंबर 2014 में कंपनी को 9 करोड़ से ज्यादा राशि जमा करवाने के आदेश जारी किए गए थे। साल 2014 पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट भी नगर निगम को राशि वसूल करने के आदेश जारी कर चुका है।