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गर्मी से संकट: पंजाब में बिजली की खपत में रिकॉर्ड 43 फीसदी की वृद्धि, AIPEF ने जताया गंभीर संकट का अंदेशा

Tue, 18 Jun 2024 01:36 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला

सार

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने सीएम को लिखे पत्र में पंजाब के बाकी हिस्सों में धान की रोपाई को 25 जून तक शिफ्ट करने को कहा है। फेडरेशन के मुताबिक इस तारीख से पहले किसी भी धान लगाने की अनुमति न दी जाए। साथ ही ज्यादा पानी लेने वाली किस्मों पुसा 44 पर सख्ती के साथ प्रतिबंध लगाया जाए।
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बिजली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीवियर हीटवेव के बीच धान का सीजन शुरू होने के चलते पंजाब में जून माह में बिजली की खपत में रिकॉर्ड 43 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। हालात यह हैं कि जून 2023 में जहां बिजली की अधिकतम मांग 11309 मेगावाट दर्ज की गई थी, वहीं इस बार 15775 मेगावाट दर्ज की गई है। इसमें आने वाले दिनों में और वृद्धि होने की आशंका है। 

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ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने अंदेशा जताया है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले दिनों में ग्रिड पर लोड बढ़ जाने से पंजाब ही नहीं, पूरे देश में गंभीर बिजली संकट पैदा हो सकता है। इसे देखते हुए फेडरेशन ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से पंजाब में दफ्तरों के समय में बदलाव करते हुए इसे सुबह सात बजे से दोपहर 2 बजे करने का सुझाव दिया है। 

फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे के मुताबिक दफ्तरों के साथ-साथ शापिंग माल व दुकानों को भी शाम सात बजे तक बंद कराया जाना चाहिए। साथ ही उद्योगों पर पीक लोड प्रतिबंध लगने चाहिए। सबसे अहम पहल पर सेंटर पूल से पंजाब के लिए अतिरिक्त 1000 मेगावाट बिजली का प्रबंध किया जाए। इस संबंध में सरकार तुरंत केंद्रीय बिजली मंत्रालय से संपर्क करे।
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बिजली का गंभीर संकट पैदा होने की संभावना
फेडरेशन के मुताबिक बिजली की सप्लाई व उपलब्धता की मौजूदा स्थिति को देखते हुए जून के अंत तक जब पूरे पंजाब में ही धान की बुवाई होगी, उस समय बिजली का गंभीर संकट पैदा होने की पूरी संभावना है। इसलिए जरूरत है अभी तत्काल प्रभाव से फेडरेशन की ओर से सुझाए कदमों को उठाकर स्थिति को सही दिशा में लाया जाए। 

फेडरेशन ने सीएम को लिखे पत्र में पंजाब के बाकी हिस्सों में धान की रोपाई को 25 जून तक शिफ्ट करने को कहा है। फेडरेशन के मुताबिक इस तारीख से पहले किसी भी धान लगाने की अनुमति न दी जाए। साथ ही ज्यादा पानी लेने वाली किस्मों पुसा 44 पर सख्ती के साथ प्रतिबंध लगाया जाए। केवल पीआर-126 और बासमती को ही लगाया जाए। यह किस्में पानी भी कम लेती हैं और 90 दिनों में पक जाती हैं। इसके साथ ही बिजली चोरी पर रोक लगाने, मुफ्त बिजली की नीति पर दोबारा से विचार करने का भी सुझाव दिया है।

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