पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ बगावत करने के मामले में जिला कांग्रेस के पूर्व प्रधान पवन दीवान और पांच पदाधिकारियों को पार्टी की अनुशासन कमेटी ने छह साल के लिए बाहर कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी खेमे के तीन दर्जन पदाधिकारियों ने अनुशासन कमेटी के इस फैसले के खिलाफ अपने इस्तीफे दे दिए हैं।
सभी पदाधिकारियों ने अपने इस्तीफे कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिए हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि जिला कांग्रेस में बगावती सुर खुलकर सामने आने लगे हैं। अपने इस्तीफे में पूर्व जिला प्रधान पवन दीवान के खिलाफ लिए गए फैसले को रद्द करने की भी मांग की है।
ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं बाजवा
इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बाजवा अपनी इस ताकत को पार्टी की मजबूती के लिए इस्तेमाल करने में नाकाम रहे हैं। अब इसका इस्तेमाल उनके इशारों पर काम न करने वाले जिला प्रधान व ब्लाक प्रधानों के खिलाफ कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अनुशासन कमेटी का यह फैसला जो न केवल गलत उदाहरण पेश करेगा, बल्कि पंजाब भर के पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराएगा। उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से बाजवा को जल्द से बदलने की मांग की है।
अब तक इन लोगों ने दिया इस्तीफा
इस्तीफा सौंपने वालों में बलविंदर सिंह बेदी, इंद्रजीत टोनी कपूर, नवनीश मल्होत्रा, सन्नी कैंथ, डॉ. ओंकार चंद शर्मा, गोपाल कृष्ण गर्ग, संजीव सूद, रविंदर अरोड़ा, विनोद कुमार पम्मी, रोहिता पाहवा, हरभगत सिंह गरेवाल, सुनील मैफिक, रमेश हांडा, राजेश सोनी, अमृतपाल सिंह, जसबीर गिल, संजीव सहगल, अमनदीप सिंह, मदन लाल मधु, रजनीश चोपड़ा, नरिंदर सिंह सरां, हरजिंदर सिंह ओम, कमल कृष्ण शर्मा, अवतार सिंह कंडा, बहादुर सिंह रियैत, सुनील शुक्ला, प्रवीण शर्मा, साधू राम सिंघी, दलजीत राय भारद्वाज, मनी भगत, लखबीर चंद, बोध राज, पवन शुक्ला, ज्ञान चंद, बलजिंदर सिंह और गौरव चोपड़ा मौजूद थे।