मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रदेश की जिम्मेदारी का हवाला देकर घर संभाले रखने की भावुक अपील कर यहां से निकल गए हैं। लेकिन घर की बगावत उन्हें बेफिक्र होकर घूमने देगी, ऐसे आसार कम ही नजर आ रहे हैं। हालत ये है कि शहर और कलानौर में बगावत थमने का नाम नहीं ले रही है। ऐसे में रूठों को मनाने की कमान सीएम परिवार के जिम्मे आन पड़ी है।
सीएम की कोठी फिलहाल रूठों को मनाने का मुख्यालय बन गई है। सीएम की पत्नी आशा हुड्डा अलसुबह से देर रात तक रूठों को मनाने में जुटी रहती हैं वहीं दीपेंद्र भी गाहे बगाहे यहां पहुंचकर प्रदेश के रूठों को मनाने में जुटे हैं। प्रदेश की राजनीतिक राजधानी माने जाने वाला रोहतक जिला इस बार चुनावों में मुख्यमंत्री के लिए चिंता का सबब बन रहा है।
हालांकि वे महम और गढ़ी सांपला किलोई को लेकर काफी आश्वस्त हैं, लेकिन रोहतक और कलानौर विधानसभा सीटों पर कांग्रेस में तेज हुए बगावत के सुरों ने चिंता बढ़ा दी है।
आशा हुड्डा ने सीधे संभाली कमान
रोहतक सीट ही नहीं कलानौर विस सीट पर भी कमोबेश इसी तरह के हालातों का सामना कांग्रेस को करना पड़ रहा है। यहां की प्रत्याशी एवं विधायक शकुंतला खटक का राजनीतिक कद बहुत बड़ा नहीं है।
पांच साल पहले विधायक बनने के बाद क्षेत्र के लोगों और कार्यकर्ताओं में भी भारी नाराजगी सामने आई। कलानौर से वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयहिंद कलिंगा ने भी कांग्रेस से बगावत कर आजाद उम्मीदवार के रूप में नामांकन कर दिया है।
ऐसे में रोहतक और कलानौर के रूठों को मनाने के प्रयास भी काफी तेज हो गए हैं। इसकी कमान सीधे तौर पर सीएम की पत्नी आशा हुड्डा ने संभाल ली है। वे पिछले कई दिनों से रोहतक में डी पार्क स्थित कोठी पर ही रुकी हैं।
हाल ही में शहर के कई कांग्रेस नेता जो कहीं न कहीं नाराज थे। उन्हें मनाने के लिए आशा हुड्डा ने उनसे मिलना जुलना भी शुरू कर दिया है।
रूठों को मनाना ही पड़ेगा
आशा हुड्डा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि हालांकि मैं एक्टिव पॉलीटिक्स में नहीं हूं, लेकिन मैं ऐसे परिवार से हूं जिनकी रगों में कांग्रेस बसती है। कांग्रेस बड़ा परिवार है, इसलिए नाराजगी भी हो जाती है।
उन रूठे हुए परिवार के सदस्यों को मना लिया जाएगा। दीपेंद्र भी नाराज लोगों को मनाने के लिए रोहतक पहुंचेंगे। उन्होंने माना कि कलानौर में कुछ लोगों की नाराजगी की बात आई थी, लेकिन शुक्रवार को वे वहां थीं। वहां कोई बड़ी नाराजगी सामने नहीं आई।
सूत्रों का कहना है कि कई नाराज कार्यकर्ताओं को उन्होंने शांत कर मना भी लिया है। आगे भी उनके प्रयास लगातार जारी हैं। इसके लिए बाकायदा उनके चाय कार्यक्रम भी तय हो गए हैं।
शुक्रवार को भी आशा हुड्डा कलानौर में रही। तीन दिन पूर्व दीपेंद्र हुड्डा भी यहां मौजूद थे और टिकट वितरण से नाराज हुए सिरसा के एक बड़े पंजाबी नेता वह को यहां बुलाया गया था।
देर रात तक दीपेंद्र ने उन्हें मनाया। इसके अलावा भी सुबह से रात तक न केवल रोहतक बल्कि आसपास के जिलों से भी नाराज कार्यकर्ताओं को यहां बुलाकर मनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
हुड्डा परिवार पर रूठों को मनाने की जिम्मेदारी
सीएम हुड्डा को भी इसका आभास है। दो दिन पहले नामांकन के मौके पर अंबेडकर चौक से लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने उम्मीदवारों से नाराजगी भूल कर खुद को वोट देने की अपील यूं ही नहीं की थी।
इस कार्यक्रम में भी शहरी लोगों की लगभग अनुपस्थिति उनके चेहरे पर तनाव के रूप में साफ दिखाई दे रही थी। शहरी सीट से बीबी बत्रा विधायक हैं। उन्हें हाल ही में सर्वश्रेष्ठ विधायक का अवार्ड भी मिला है।
पार्टी ने उन पर विश्वास जताया है। इसी प्रकार कलानौर में भी मौजूदा विधायक शकुंतला खटक पर ही विश्वास जताया है। भले ही इसका उन्हें फायदा है, लेकिन स्वाभाविक रूप से एंटी इंकमबेंसी फैक्टर से भी जूझना पड़ रहा है।
दोनों प्रत्याशियों के खिलाफ कांग्रेसियों में नाराजगी भी सामने आ रही है। ऐसे में रूठों को मनाने की जिम्मेदारी भी अब सीएम परिवार पर ही आ गई है।
गुपचुप भीतरघात करने वालों की ज्यादा तादाद
शहर विस की बात करें तो टिकट मिलने से पहले ही व्यापारी नेता गुलशन डंग समेत कई पुराने कांग्रेसियों ने बैठक कर अपने इरादों से अवगत करा दिया था।
चार दिन पहले ही पार्टी के जिला महासचिव एवं व्यापारी नेता जोगेंद्र सैनी और कांग्रेस नेता गुलशन नारंग भी बीजेपी का दामन थाम चुके हैं।
खुली बगावत ना कर गुपचुप भीतरघात करने वालों की भी बड़ी फौज है। ये वे लोग हैं जो कोठी की लिहाज में खुलकर मुखालफत नहीं कर रहे हैं, लेकिन कसर भी नहीं छोड़ रहे हैं।
जहां तक सवाल मनमोहन गोयल की बगावत का है तो इसके आसार काफी पहले ही बन गए थे। फिलहाल वे भाजपा कैंप में हैं और भाजपा के रणनीतिकार उनके कद का पूरा लाभ उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।