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नवजोत सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर के बीच दूरियां क्यों बढ़ीं, दो वजहें आई सामने और एक कारण पत्नी हैं

Mon, 22 Jul 2019 12:59 PM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
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सिद्धू बनाम कैप्टन - फोटो : file photo
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आखिरकार नवजोत सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच इतनी दूरियां क्यों आईं कि इस्तीफे की नौबत आ गई। इसकी दो वजह सामने आई हैं और एक कारण तो पत्नी हैं। दरअसल, 2017 के विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में कांग्रेस को मिली भारी सफलता ने पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू के भीतर यह भ्रम पैदा कर दिया था कि कांग्रेस की जीत में उनके द्वारा की गई 100 से अधिक चुनावी सभाओं का बड़ा योगदान है।
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सिद्धू यह दावा करने लगे थे कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव में 60 सीटों तक ही सिमट जाती, यदि कांग्रेस को 75 सीटें मिली है तो यह उनके चुनाव प्रचार और साफ सुथरी छवि के कारण मिली है। इसी को आधार बनाकर सिद्धू पहले उपमुख्यमंत्री पद की मांग करते रहे। उनकी यह इच्छा तो पूरी नहीं हुई लेकिन शहरी मतदाताओं के साथ सीधे जुड़े स्थानीय निकाय विभाग की जिम्मेदारी मिलने पर वे कैप्टन को ही चुनौती देने लगे थे। नवजोत सिद्धू अमृतसर संसदीय क्षेत्र से तीन बार लोकसभा का चुनाव जीते।

जीतने के बाद सिद्धू ने गुरुनगरी के लोगों के साथ कभी सीधा संपर्क नहीं रखा। सिद्धू की पहली जीत (2004) में एक लाख वोटों की थी। लोगों से दूरियों के कारण 2007 उपचुनाव में उनकी जीत का मार्जिन 70 हजार मतों तक सीमित हो गया। 2009 के लोकसभा चुनाव में सिद्धू मात्र सात हजार मतों से ही जीत पाए। 2017 में अमृतसर पूर्वी 42 हजार से अधिक मतों से जीतने वाले सिद्धू लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को 10 हजार वोटों से ही जीत दिलवा सके। स्थानीय निकाय मंत्री होने के बावजूद सिद्धू अपने विधानसभा हलके के स्लम आबादियों की दशा सुधारने में नाकाम रहे।
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डॉ. सिद्धू की अति महत्वाकांक्षा ने भी नुकसान पहुंचाया

सिद्धू के आसपास के लोगों ने भी सिद्धू और कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच दूरियां पैदा की। डॉ. नवजोत कौर की अति महत्वाकांक्षा ने भी सिद्धू के लिए मुसीबतें पैदा की। डॉ. सिद्धू का लोकसभा चुनाव में चंडीगढ़ से टिकट मांगना और उसमें सिद्धू का कूदना भी सिद्धू-कैप्टन के बीच दूरियां पैदा कर गया। सिद्धू के ओएसडी बन्नी और कभी उनकी पत्नी के निजी सचिव रहे गौरव ने भी सिद्धू की छवि को नुकसान पहुंचाया।

जीरकपुर और नगर सुधार ट्रस्ट अमृतसर में विजिलेंस की छापेमारी के दौरान मिली जानकारी आगामी दिनों में सिद्धू के लिए समस्याएं खड़ी कर सकती है। अमृतसर में इस बात की चर्चा थी कि नगर सुधार ट्रस्ट के ठेकेदारों की फाइल सिद्धू के घर जाती हैं। नवजोत सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर द्वारा नगर निगम कार्यालय में अपने लिए अपना अलग दफ्तर बनाना भी कैप्टन समर्थक मेयर करम जीत सिंह रिंटू के लिए नई चुनौतियों को पैदा करने का प्रयास था।

रिंटू ने इस बारे में कैप्टन को शिकायत भी की थी। हालांकि इस दफ्तर में डॉ. सिद्धू एक दिन भी नहीं बैठी लेकिन उसके नवीनीकरण में लाखों की राशि खर्च हुई जिसे निगम द्वारा मुहैया नहीं करवाया गया था। यह राशि किसने दी, इस पर कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता मनदीप मन्ना ने कई सवाल खड़े किए हैं।
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