देश में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सरकार रोज नए-नए प्रावधान और योजनाएं बनाने की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत तो बेहद भयावह है। पंजाब में सरहद से सटे गांवों में बने सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूलों में शिक्षकों का अभाव है, बच्चों के बैठने के लिए बैंच नहीं हैं, पीने को पानी नहीं व कमरों की हालत खस्ता है। महीने में सिर्फ 15 दिन क्लास लगती है, वो भी टीचर आ जाए तो।
दोपहर 12 बजे
भारत-पाक सीमा से लगभग 100 मीटर की दूरी पर बने सरकारी प्राइमरी स्कूल भखड़ा में दोपहर बारह बजे न तो शिक्षक थे और न ही विद्यार्थी, जबकि छुट्टी का समय दोपहर बाद दो बजे का है। स्कूल का मुख्य गेट खुला था, अंदर दो क्लास रूम खुले थे, पांच कुर्सियों के आगे एक मेज पर खाली गिलास पड़ा हुआ था। स्कूल के मुख्य गेट से एक महिला बाहर आई। उसने बताया कि वह स्कूल में बच्चों के लिए भोजन बनाती है।
उक्त महिला से पूछा कि टीचर कहां है तो जवाब मिला टीचर थोड़ी देर पहले ही गया है। बच्चे खाना खाकर घर चले गए। स्कूल में लगभग 50 बच्चे पढ़ते हैं। पहली कक्षा से पांचवीं कक्षा के लिए एक शिक्षक है। महीने में लगभग 15 दिन स्कूल लगने की बात कही गई। स्कूल में पीने के पानी का बंदोबस्त नहीं, हैंडपंप खराब पड़ा है। स्कूल के कमरों की हालत खस्ता है, छतों का बुरा हाल है।
दोपहर 1.15 बजे
गांव टिंडी वाला का सरकारी प्राइमरी स्कूल सरहद पर लगी फेंसिंग से 50 मीटर की दूरी पर है। स्कूल में एक कक्षा में बच्चे टाट व बोरियां बिछाकर बैठते हैं। दूसरी कक्षा में बैंच पर बैठे थे। यहां लगभग 92 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें 12 बच्चे प्री-प्राइमरी के हैं। उक्त बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ एक ही शिक्षक है, जिसका नाम छिंदर पाल है।
स्कूल के दो कमरों की हालत खस्ता है। छत गिरने के कगार पर है। फर्श टूटा पड़ा है। बच्चों के पीने के लिए शुद्ध पेयजल तक नहीं है। शिक्षक छिंदर पाल ने कहा कि स्कूल में चार शिक्षकों की जरूरत है, कई बार स्टाफ उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग को लिखकर भेजा है, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
गांव टिंडी के पूर्व सरपंच अजीत सिंह का कहना है कि कई बार डीसी और डीईओ को स्कूल में शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए कहा गया, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने बताया कि गांव कालू वाला में सरकारी स्कूल खोला गया था। गांव सतलुज दरिया से तीनों तरफ से घिरा हुआ है।
चौथी तरफ से पाकिस्तान की सीमा लगती है। उक्त स्कूल को बंद कर दिया गया है और यहां पर कोई भी शिक्षक जाने को भी तैयार नहीं है। उक्त गांव के बच्चे अब टिंडी वाला के सरकारी स्कूल में आते हैं, वो भी दरिया पार करके। दरिया का जलस्तर बढ़ा हुआ है, इसलिए किश्ती के माध्यम से बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। कई बार किश्ती दरिया में डूब चुकी हैं।
उधर, डीईओ प्राइमरी सुखविंदर सिंह का कहना है कि स्कूल भखड़ा और टिंडी वाला सर्वशिक्षा अभियान के तहत खुले थे। सर्वशिक्षा अभियान के शिक्षक ही पढ़ाते थे। कुछ साल पहले ही उक्त स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने अंतर्गत लिए हैं। धीरे-धीरे स्कूलों में स्टाफ और बैंच पूरे किए जा रहे हैं। बॉर्डर एरिया के स्कूलों में जल्द ही आरओ लगाए जाएंगे। भखड़ा में शिक्षक के गैरहाजिर होने के मामले की जांच करेंगे।