कोटा और राजकोट के अस्पतालों में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद से देशभर में हड़कंप मचा हुआ है। चंडीगढ़ के अस्पतालों में भी बच्चों के इलाज में भारी लापरवाही बरती जा रही है। अमर उजाला ने वीरवार को जब सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का दौरा किया तो इस बात का खुलासा हुआ। अस्पताल के पोस्ट नेटल वार्ड में इलाज के नाम पर मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ऐसे में नवजात शिशुओं पर संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यहां भी स्थिति खराब हो सकती है।
गंदे बेड पर चादर और शॉल में लपेटकर दी जा रही गर्मी
हॉस्पिटल के एरिया नंबर 11 स्थित पोस्ट नेटल वार्ड (वन) में भर्ती प्री-मेच्योर बच्चों को नियोनेटल केयर यूनिट में रखने की बजाय जनरल वार्ड में भीड़ के बीच गंदे बेड पर रखा जा रहा है। इतना ही नहीं हाइपोथर्मिया और पीलियाग्रस्त बच्चों को गंदे बेड पर ही चादर और शॉल से लपेटकर रखे गए फोटोथेरेपी मशीन के अंदर रखकर गर्मी दी जा रही है। वार्ड में आने वाले लोग यह देखकर हैरान हो जाते हैं, लेकिन यहां मौजूद डॉक्टरों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
मशीन में एक साथ रखे जा रहे तीन बच्चे, संक्रमण का खतरा
समय से पहले जन्म लेने वाले दो से डेढ़ किलोग्राम के प्री-मैच्योर बच्चों को पीलिया और हाइपोथर्मिया की सबसे ज्यादा शिकायत रहती है। इससे बचाव के लिए अस्पताल प्रशासन फोटोथेरेपी मशीन इस्तेमाल करता है, लेकिन एक मशीन में तीन नवजात शिशुओं को रखकर उन्हें गर्मी देने की कोशिश हो रही है, जबकि मानकों के मुताबिक, एक समय में मशीन में केवल एक बच्चे को रखा जाना चाहिए।
एक साथ एक से अधिक बच्चों को मशीन में रखने से इन बच्चों को एक दूसरे से संक्रमण (क्रास इंफेक्शन) का खतरा रहता है। हैरत की बात यह है कि यहां भर्ती बच्चों के माता-पिता को इस स्थिति की कोई जानकारी ही नहीं है। उन्हें तो यह लग रहा है कि उनके बच्चे को एक मेडिकल कॉलेज में बेहतर इलाज मिल रहा है, जबकि स्थिति इसके ठीक उलट है।
एक बेड पर चार लोगों का इलाज
22 बेड के पोस्ट नेटल वार्ड में वीरवार को 70 मरीज भर्ती थे। इनमें 40 बच्चे और 30 महिलाएं शामिल हैं। एक-एक बेड पर दो-दो माताओं और दो-दो बच्चों को भर्ती किया गया है। इनमें ऑपरेशन से लेकर डिलीवरी कराने वाली महिलाएं भी शामिल हैं, जो ठीक से करवट भी नहीं ले सकतीं। लेकिन वे व्यवस्था के आगे हार बेबस होकर एक बेड पर दूसरे मरीजों के साथ इलाज कराने को मजबूर हैं।
सालों से मशीन पड़ी है डंप
हॉस्पिटल में अव्यवस्था का आलम ये है कि अस्पताल में नियोनेटल केयर यूनिट के लिए आठ फोटोथेरेपी मशीन खरीदी गईं, लेकिन वे डंप पड़ी हैं। कारण, उसके लिए अलग यूनिट बनाने का स्थान उपलब्ध न होना है। ऐसी स्थिति में उन मशीनों को वार्ड में ही एक किनारे डंप करके रखा गया है। अगर ये मशीनें इंस्टॉल कर दी जाएं तो वार्ड में बेड पर फोटोथेरेपी देने या तीन बच्चों को एक साथ मशीन में रखने की नौबत नहीं आएगी।
हम संक्रमण नियंत्रण में बेहतर हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों को संक्रमण होने का कोई खतरा नहीं है, क्योंकि इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी हर महीने इसकी जांच करती है कि अस्पताल के किस कोने में संक्रमण का कितना खतरा है। जहां तक फोटोथेरेपी मशीन को चादर और शॉल में लपेटकर और बेड पर रखकर बच्चों को गर्मी देने का सवाल है तो इस बारे में एचओडी से बात करूंगा। एक बेड पर चार मरीजों को भर्ती करने भर्ती करने के बारे में भी बात की जाएगी।
- डॉ. रवि गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल-32