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फादर्स डे: हादसे ने छीनी पिता की आंखों की रोशनी तो सात साल का बेटा बन गया सहारा

Sun, 21 Jun 2020 06:25 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • विवेक के पिता संजीव की गुब्बारे में गैस भरने के दौरान सिलेंडर फटने से चली गई थी रोशनी 
  • विवेक पिता के साथ जाता है साइकिल पर गुब्बारे बेचने, साथ में हाथ पकड़कर दिखाता है रास्ता 
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फादर्स डे
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विस्तार
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बच्चे जवान होकर अपने माता-पिता का सहारा बनते हैं लेकिन विवेक सात साल की उम्र में ही अपने पिता का सहारा बन गया। आज वह आंखों की रोशनी खो चुके पिता संजीव के साथ साइकिल पर गुब्बारे बेचने जाता है और साथ में पढ़ाई भी कर रहा है। सेक्टर- 56 निवासी 35 वर्षीय संजीव काफी सालों से गुब्बारे बेचने का काम कर रहे थे। 

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एक दिन सेक्टर- 22 में वह सिलेंडर से गुब्बारे में गैस भर रहे थे। इस दौरान सिलेंडर फटने से उनकी आंखों में समस्या आ गई। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें दिखना काफी हद तक कम हो गया। संजीव की आंखों का पीजीआई से इलाज चल रहा था लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सेक्टर 32 से अपना इलाज शुरू करवा दिया। लॉकडाउन होने के बाद ओपीडी बंद होने के कारण उनका इलाज रुक गया। उन्हें बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता। इस दौरान विवेक ने अपने पिता का हाथ थाम लिया।  

विवेक सेक्टर 56 के सरकारी स्कूल में पढ़ता है। विवेक अपने पिता के हर काम में सहायता करता है। पिता कहीं भी जाते हैं तो विवेक हमेशा हाथ पकड़कर रास्ता दिखाता है। इसके अलावा विवेक अपने पिता का हाथ पकड़कर गुब्बारे बेचने भी जाता है।
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विवेक की मां सेक्टर- 43 में सफाई का काम करती है। उनकी मां की तनख्वाह और गुब्बारे बेचने से उनके घर का खर्च चलता है। संजीव ने बताया कि उसकी दो बेटियां भी हैं लेकिन विवेक ने उनको काफी सहारा दिया है। विवेक उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझता है। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी उम्र में विवेक उनके दिल की हर बात को आसानी से समझ लेता है।

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