स्केटिंग रिंक पर अभ्यास करते खिलाड़ी
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। खेल विभाग और यूटी प्रशासन जहां शहर में एक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्केटिंग रिंक नहीं बना पाया वहीं मोहाली के पास गांव ढेलपुर में रंजीत सिंह ने उत्तर भारत का सबसे बड़ा स्केटिंग रिंक बना दिया। अब स्थानीय खिलाड़ियों को दक्षिण भारत और अन्य जगहों का रुख नहीं करना पड़ रहा है। यहीं पर उन्हें सुविधा मिल रही है।
लांडरां-बनूड रोड के पास स्नेटा के गांव ढेलपुर में बने रिंक में स्केटिंग खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल रही हैं। यहां विदेशी स्केटिंग रिंक की तर्ज पर रेसिंग का 200 मीटर का पैराबॉलिक ट्रैक बनाया गया है। ओपन एरिया में दो एकड़ जमीन पर बना यह स्केटिंग रिंक देश का सबसे बड़ा रेसिंग ट्रैक है। इस ट्रैक पर 200, 500, 1000 मीटर रेस के साथ पांच किलोमीटर और 10 किलोमीटर की रेस में खिलाड़ी हिस्सा ले सकते हैं।
ट्राइसिटी में कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं
ट्राइसिटी और आसपास स्केटिंग का कोई खास इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। उत्तरी क्षेत्र के स्केटिंग खिलाड़ियों को नेशनल की तैयारियों के लिए दक्षिण भारत में बने स्केटिंग रिंक में अभ्यास करने जाना पड़ता था। इसमें एक खिलाड़ी के अभिभावक के एक लाख से अधिक रुपये खर्च हो जाते थे। अब यहां पर इंटरनेशनल लेवल का स्केटिंग रिंक बनने से उत्तर भारत के खिलाड़ियों को साउथ और अन्य जगहों पर अभ्यास के लिए नहीं जाना पड़ेगा।
ऐसे बना इंटरनेशनल लेवल का रिंक
इस रिंक के सबसे पहले कोच रहे हरकिरण सिंह निप्पी ने बताया कि वह वर्ष 2003 में साउथ अमेरिका में वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान भारत की टीम के कप्तान रहे हैं और चंडीगढ़ के रहने वाले हैं। एक स्केटिंग खिलाड़ी के अभिभावक रणजीत सिंह से मुलाकात कर उन्होंने इस बारे में चिंता जताई। रणजीत सिंह ने डेढ़ करोड़ की जमीन खरीद कर उस पर स्केटिंग रिंक बनवा दिया। रोलर स्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने यहां लगातार दौरा किया और उनके मापदंडों के अनुसार इस स्केटिंग रिंक को बनाया गया।