इस अवसर पर पूर्व मंत्री सेवा सिंह सेखवां ने कहा कि कुर्बानियों से बना अकाली दल अमीर लोगों की पार्टी बन कर रह गया है। बादल ने 1997 में पंजाब की सत्ता संभालते ही संविधान में कई परिवर्तन कर दिए। वर्तमान अकाली दल सिख जनमानस की राजनीति पार्टी नहीं रही। पूरा पंजाब वर्तमान अकाली दल के विरोध में खड़ा है। बादल परिवार ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का सियासीकरण कर दिया है।
अकाल तख्त की मान-मर्यादा को चोट पहुंचाई है। सेखवां ने अकाली लीडर पर तंज कसा कि सुखबीर बादल, बिक्रम मजीठिया और अन्य अकाली लीडर्स की औकात नहीं है कि वह हमसे सवाल करें। प्रकाश सिंह बादल बात करें, उनको जवाब दिया जाएगा। अकाली दल को बादल परिवार से मुक्त करवाना ही हमारा उद्देश्य है। इस दौरान रविंदर सिंह ब्रह्पुरा और अमर पाल सिंह बोनी भी उपस्थित थे।
बादल और कैप्टन परिवार की राजनीतिक सांझ
सेखवां ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में नया अकाली दल भाग लेगा या नहीं, इसके बारे में बाद में फैसला किया जाएगा। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और बादल परिवार के बीच राजनीतिक सांझ है। दोनों परिवार एक दूसरे का राजनीतिक नुकसान नहीं करेंगे। उन्होंने आशंका प्रकट की कि आगामी विधानसभा चुनाव बादल परिवार और कैप्टन परिवार मिलकर लड़ेंगे।
बादल के विरुद्ध हुए टकसाली : डॉ. राजकुमार
विधायक डॉ. राजकुमार ने कहा कि अकाली दल टूट गया है। टकसाली अकाली बादल परिवार से छुटकारा पाना चाहते है। बादल को चाहिए कि अब वह अकाली दल से इस्तीफा दे कर घर बैठ जाएं।
बागियों का कोई आधार नहीं : वल्टोहा
अकाली दल के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक विरसा सिंह वल्टोहा ने कहा कि सत्ता का आनंद मानने वाले ब्रह्मपुरा का कोई राजनीतिक आधार नहीं है। 2012 में जब अकाली दल ने दूसरी बार पंजाब में सरकार बनाई थीं, तब ब्रह्मपुरा चुनाव हार गए थे। सेवा सिंह सेखवां चार बार विधानसभा का चुनाव हार चुके है।