पार्टी प्रवक्ता हरचरण बैंस ने बताया कि पार्टी ने अफसोस जताया कि दोनों नेताओं ने प्रकाश सिंह बादल व सुखबीर द्वारा दिखाई उदारता का नाजायज फायदा उठाया। पार्टी और सीनियर लीडरशिप के साथ बुरा बर्ताव किया। ब्रह्मपुरा को अपने क्षेत्र में सभी नेताओं से ज्यादा सम्मान दिया गया। वह चार बार विधायक, दो बार मंत्री और बादल के बाद सबसे सीनियर पदों पर रहे।
दोनों नेता पार्टी की सरकार के समय लिए गए सभी फैसलों में शामिल रहे। ब्रह्मपुरा ने खडूर साहिब उप चुनाव में अपने बेटे को लड़ाने को जोर डाला। अपने भतीजे अलविंदर पाल सिंह पखोके को सूचना कमिश्नर बनवाया। अजनाला को भी विधानसभा की टिकट दी गई, सांसद बनवाया गया। कोर कमेटी ने कहा कि अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
पंथक मोर्चे के साथ जा सकते हैं टकसाली
शिरोमणि अकाली दल द्वारा निष्कासित किए गए टकसाली अकाली नेताओं के अब बरगाड़ी में चल रहे पंथक मोर्चे के साथ जाने की उम्मीद की जा रही है। रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा से लेकर सेवा सिंह सेखवां तक सभी नेताओं पार्टी पर पंथक एजेंडे से हटने का आरोप लगा कर इसके संकेत भी दिए थे। सियासी माहिरों का कहना है बरगाड़ी मोर्चे में एक तीसरे विकल्प बनने की संभावना भी बन गई है। क्योंकि अकाली दल द्वारा टकसालियों से निष्कासन से पहले आम आदमी पार्टी भी बागी सुखपाल खैरा और कंवर संधू को निकाल चुकी है। ये सारे गुट इकट्ठे हो सकते हैं।