हरियाणा के कैथल से कांग्रेस विधायक और एआईसीसी कोर कमेटी के सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने धान व बाजरा की खरीद में व्यापक धांधलेबाजी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बेतुके नियम थोपकर किसान की कमर तोड़ दी है। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि व जलभराव ने गन्ना, धान, कपास व बाजरे की फसलों को 25 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचाया है।
बेमौसम बारिश से पूरे हरियाणा, खासतौर से दक्षिणी व उत्तरी हरियाणा में बाजरा, कपास, धान व गन्ने की फसलों को भारी नुकसान हुआ। 50 मन (20 क्विंटल) प्रति एकड़ से अधिक कपास की पैदावार की उम्मीद कर रहे किसान की पैदावार घटकर 20 मन (8 क्विंटल) प्रति एकड़ के करीब रह गई। यही हाल बाजरे की फसल का हुआ।
1509 व 1121 बासमती किस्म का धान पैदा करने वाले उत्तर हरियाणा के किसान की तो पूरी फसल गिर गई है। दादरी, बाढड़ा, मुंढाल, झज्झर, महम, जुलाना, सफीदों, जींद, कैथल के हजारों एकड़ क्षेत्र में जलभराव की स्थिति है। नारनौल, महेंद्रगढ़, कनीना, अटेली, बावल, रेवाड़ी, हेलीमंडी, फरुखनगर इलाकों में बाजरा व कपास की फसलों को बारिश से भारी नुकसान हुआ है।
अक्टूबर की बारिश ने उत्तर हरियाणा के अंबाला, यमुनानगर व पंचकूला जिलों में धान व गन्ने की खेती बुरी तरह नष्ट की है। सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1770 रु. क्विंटल है पर लगभग सब मंडियों में किसान से 1575-1625 रु. क्विंटल धान खरीदा जा रहा है। चौंकानेवाली बात यह है कि सरकार के खाते में पूरा 1770 रु. क्विंटल का भाव दिखाया जा रहा है। बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1950 रु. प्रति क्विंटल है, मगर 70 प्रतिशत से अधिक किसान को 1300-1350 रु. प्रति क्विंटल मूल्य दिया जा रहा है। रेवाड़ी, बावल, अटेली, कोसली, कनीना, फरुखनगर, नारनौल, महेंद्रगढ़ मंडियों में इसकी पुष्टि की जा सकती है।