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कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला बोले- एससी/एसटी व ओबीसी का विरोध भाजपा का मुख्य एजेंडा

Sat, 15 Feb 2020 12:33 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • एससी व ओबीसी के अधिकारों पर भाजपा ने किया सबसे बड़ा हमला।
  • हरियाणा में 16 फरवरी को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी कांग्रेस।
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रणदीप सुरजेवाला - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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रणदीप सुरजेवाला और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा कि एससी, बीसी और आदिवासियों का नौकरियों में आरक्षण का हक कोई नहीं छीन सकता। यह संविधान के अनुच्छेद 15 (4), 16 (4) के अनुसार मौलिक अधिकार है। इन वर्गों का उत्पीड़न भाजपा सरकारों का डीएनए बन गया है। भाजपा सरकार ने एससी/एसटी, ओबीसी और आदिवासियों के अधिकारियों को छीनने के लिए अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है।

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सुप्रीम कोर्ट में 14 नवंबर 2019 को स्टेट ऑफ उत्तराखंड बनाम अवधेश कुमार मामले में एसएलपी डाली गई थी। जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने नौकरियों में आरक्षण को मौलिक अधिकार नहीं माना है। 

सुरजेवाला ने कहा- सुप्रीम कोर्ट यह निर्णय नहीं सकता कि नौकरियों में आरक्षण देना है या नहीं। आरक्षण को लेकर बिहार चुनाव से पहले भी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और मनमोहन वैद्य ने पुनर्विचार की जरूरत बताई थी। अब पानी सिर से ऊपर गुजर चुका है। कोई किसी के मौलिक अधिकार नहीं छीन सकता। 
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पीएम नरेंद्र मोदी को उत्तराखंड के सीएम को बर्खास्त करना चाहिए, जिनके शासनकाल में एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में डाली गई। यह भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की हामी के बिना संभव नहीं है। कांग्रेस से जुड़े लोगों ने इस मामले में पुनर्विचार याचिका लगाई है। उनकी केंद्र सरकार व पीएम से अपील है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को निरस्त कराएं। 

इसे इसलिए निरस्त कराना जरूरी है, चूंकि 7 फरवरी 2020 को आया सुप्रीम फैसला लागू होने से राज्य सरकारों पर निर्भर करेगा कि वे नौकरियों में इन वर्गों को आरक्षण देना चाहती हैं या नहीं। सैलजा ने कहा कि 16 फरवरी को पूरे प्रदेश में इसके विरोध में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे। डीसी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। जिसे राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजने की मांग की जाएगी।

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साढ़े चार साल में दर्ज हुए 3695 केस

कुमारी सैलजा ने कहा कि एससी/एसटी और ओबीसी का विरोध भाजपा का मुख्य एजेंडा है। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में साढ़े चार साल में एससी उत्पीड़न के 3695 केस दर्ज हुए हैं। केंद्र व हरियाणा सरकार ने तो एससी/एसटी का सब प्लान ही खत्म कर दिया है। अब इन वर्गों को जनसंख्या के अनुसार बजट आवंटित नहीं होगा। 2011 की जनगणना अनुसार एससी की आबादी 21 फीसदी थी। 

दिल्ली के नतीजों से सबक लेकर गलतियां सुधारेगी कांग्रेस
दिल्ली के विधानसभा चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन से कांग्रेस सबक सीखेगी। पूर्व में हुई गलतियों को सुधारा जाएगा। चिंता और निराशा के दौर से निकलकर पार्टी हाईकमान हर कार्यकर्ता की बात सुनने वाला है। इसके बाद पार्टी के पुनर्निमाण की प्रक्रिया शुरू होगी। दिल्ली के चुनाव नतीजों से सबक लेते अन्य राज्यों में भी कांग्रेस प्रदेश इकाइयों के पेंच कसे जाएंगे। जिन राज्यों में पार्टी अंतर्कलह से जूझ रही है, वहां पर कड़े निर्णय लिए जा सकते हैं।

 दिल्ली सहित सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को इसके संकेत भी दिए जा चुके हैं। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अब समय आपसी छींटाकशी या एक-दूसरे पर उंगलियां उठाने के बजाए आगे बढ़ने का है। दिल्ली में अगर एक-दूसरे की कमियां निकालने के बजाए एकजुट होकर लड़ते तो परिणाम कुछ बेहतर होता। 

भाजपा से भी खराब रिजल्ट कांग्रेस का रहा है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली को दंगल और गृह मंत्री अमित शाह ने दंगों वाली दिल्ली बना दिया है। कांग्रेस दिल्ली को शीला दीक्षित के समय की दिल वाली दिल्ली बनाना चाहती है। दिल्ली चुनाव के समय भाजपा सांसदों व केंद्रीय मंत्रियों के दिए भड़काऊ भाषणों पर शाह को माफी मांगनी चाहिए। क्योंकि, करंट तो वह भी लगा रहे थे।

पुलवामा हमले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न करने पर जताई हैरानी
रणदीप सुरजेवाला ने पुलवामा हमले की पहली बरसी पर शहीदों को नमन करते हुए केंद्र सरकार को भी घेरा। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न करना हैरत की बात है। वह पीड़ित परिवारों के साथ हैं। कुछ सवाल आज भी अनसुलझे हैं। जिनका जवाब देश की जनता चाहती है। सीआरपीएफ जवानों के काफिले वाले मार्ग पर आरडीएक्स से भरी गाड़ी कैसे आई। आरडीएक्स कहां से आया। देश की सरकार ने हमले के बाद क्या सबक लिया। गृह मंत्री को जांच रिपोर्ट साझा करनी चाहिए। साथ ही यह भी बताना चाहिए कि डीएसपी दविंदर सिंह की पुलवामा हमले में कोई भूमिका है या नहीं। 
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