रामपाल की नियमित जमानत की मांग वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया, जिसके चलते उसने याचिका वापिस लेने की छूट मांगी। हाईकोर्ट ने छूट देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
सोमवार को केस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि रोहतक पुलिस ने जुलाई 2006 में रामपाल के खिलाफ हत्या, आर्मज एक्ट समेत कई धारा के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें कुल 128 गवाह हैं जिसमें से 125 की गवाही हो चुकी है।
सरकार ने कहा कि ट्रायल खत्म होने वाला है और ऐसे में रामपाल को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट को बताया गया कि दो अन्य मामलों में रामपाल को पहले ही उम्रकैद की सजा हो चुकी है। ऐसे में इस मामले में जमानत देने का कोई औचित्य नही है।
सरकारी वकील का पक्ष सुनने के बाद चीफ जस्टिस पर आधारित बेंच ने कहा कि वो इस याचिका को खारिज कर रहे है। इस पर रामपाल के वकील की तरफ से याचिका वापिस लेने का आग्रह किया गया। जिस पर चीफ जस्टिस ने याचिका वापिस लेने की छूट देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।