वोट की खातिर नेता किसी भी हद तक कुछ भी करने से गुरेज नहीं करता। डेरा सच्चा सौदा में जो भी नेता वोट मांगने आया उसे कभी बराबर बैठने का मौका नहीं मिला, चाहे वो मंत्री हो या सांसद। जो जितना झुककर डेरा मुखी के पैर छू गया उसकी झोली में उतनी ही ज्यादा वोटें चली गई। भाजपा की लाटरी खोलने में डेरा की अहम भूमिका रही। भाजपा नेता आखिर तक शुक्रिया अदा करने आते जाते रहे।
वर्ष 1990 के बाद गुरमीत राम रहीम सिंह ने जब गद्दी संभाली तो डेरा आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो गया। डेरा ने राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र तक अपनी दौड़ जारी रखी। धर्म और सामाजिक क्षेत्र में कार्य करके श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाई और इसी भीड़ को देखकर नेताओं की लार टपकने लगी। डेरा ने इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए राजनीतिक आशीर्वाद देना शुरू किया।
डेरा ने कई बार कई राजनीतिक दलों को धूल चटाई। डेरा में मंत्री, मुख्यमंत्री, विधायक, सांसद कद्दावरों का आना-जाना लगा। जैसे ही कोई चुनाव आता नेताओं की दौड़ डेरा तक लगी रहती थी। डेरा मुखी ने हर नेता को उसकी हद में रखा। नेता की भूख वोट से मिटती थी और वोट डेरा के पास थी। ऐसे में किसी भी कीमत पर वोट तो चाहिए थी।