अटकलों पर विराम लग गया है, साध्वी रेप केस में सजा काट रहा राम रहीम अब कहीं और नहीं जाएगा, जब तक बाकी के चार केसों का फैसला नहीं आ जाता। दरअसल, आलीशान डेरे में रहने वाले डेरामुखी का स्थाई ‘ठिकाना’ अब सुनारिया जेल ही होगी। अभी तक राम रहीम को सुनारिया जेल से शिफ्ट करने के कयास लगाए जा रहे थे।
मगर जब तक डेरामुखी के खिलाफ सीबीआई में चल रहे मुकदमों में फैसला नहीं आता तब तक सुनारिया जेल में ही रहना होगा। वर्तमान में डेरामुखी के खिलाफ सीबीआई अदालत में चार मुकदमे चल रहे है। साध्यी यौन उत्पीड़न का मामला हाल ही में खत्म हुआ है। इनमें राम रहीम को सजा हो चुकी है।
शेष बचे मामलों में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड और साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में तेजी से सुनवाई चल रही है। सीबीआई के जांच के आधार पर दावा किया जा रहा इन मामलों में भी डेरामुखी को सजा होना तय है। यह भी कारण है कि डेरामुखी को सुनारिया जेल में ही रखने का निर्णय लिया गया है।
इसलिए डेरामुखी का सही ठिकाना है सुनारिया जेल
गुरमीत राम रहीम
दरअसल, सुनारिया जेल के आसपास के गांव में एक भी डेरा अनुयायी नहीं है। जेल की लोकेशन भी शहर से करीब दस किलोमीटर दूर है। यदि डेरामुखी के अनुयायी जेल की तरफ आने का भी प्रयास करते है तो उन्हें रास्ते में कई जगहों पर रोका जा सकता है। ग्रामीण भी इसमें मदद करेंगे। सुनारिया जेल को कुछ समय पहले ही तैयार किया गया था। इस कारण सुरक्षा में भी चूक का कोई खतरा नहीं है।
सिर्फ डीजी जेल ले सकता है फैसला
वहीं, राम रहीम को सजा होने के बाद उनके वकील भी जेल बदलने की मांग कर चुके है। सजा होने के बाद उन्होंने सीबीआई कोर्ट में गुहार लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया था। यदि नियमों की बात करे तो सजा होने के बाद जेल शिफ्ट करने का फै सला जेल डीजी के हाथ में होता है। वह सुरक्षा के लिहाज से जिस जेल में चाहे सजायाफ्ता कैदी को रख सकता है। दूसरे प्रदेश में शिफ्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है।
डेरामुखी के खिलाफ कोर्ट में चल रहे केस
राम रहीम
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड
सिरसा से प्रकाशित एक सांध्य दैनिक समाचार पत्र के संपादक रामचंद्र छत्रपति ने डेरामुखी पर यौन उत्पीड़न लगाने वाले साध्वी के गुमनाम पत्र को प्रमुखता से छापा था। इस पर 24 अक्तूबर 2002 को छत्रपति की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। 12 साल से सीबीआई कोर्ट में ही सुनवाई चल रही है।
साधुओं को नपुंसक बनाने का मामला
इसी तरह करीब 400 साधुओं को नपुंसक बनाने का केस भी सीबीआई में चल रहा है। इसमें डेरा सच्चा सौदा के पूर्व अनुयायी हंसराज चौहान ने आरोप लगाया था कि डेरामुखी के आदेश पर उसे व 400 अन्य साधुओं को जबरन नपुंसक बना दिया था। इस पर डेरामुखी के खिलाफ अंगभंग का केस दर्ज किया गया था।
डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या
इसके अलावा डेरामुखी पर डेरे के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या का आरोप भी लगा था। जांच के बाद सीबीआई ने डेरामुखी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था।
फकीर चंद गुमशुदगी मामला
इसी तरह 2010 डेरे के पूर्व साधु राम कुमार बिश्नोई ने आरोप लगाया था कि डेरामुखी के आदेश पर पूर्व मैनेजर फकीरचंद की हत्या कर दी गई है। इस मामले में सीबीआई सबूत नहीं जुटा पाई थी और क्लोजर रिपोर्ट दी थी। फिर राम कुमार बिश्नोई हाईकोर्ट चले गये थे।