डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को अपनी फिल्म मैसेंजर ऑफ गॉड (एमएसजी) के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने की आशंका पहले से ही थी। यह आशंका केविएट के तौर पर उस वक्त जाहिर हुई, जब फिल्म के प्रदर्शन पर रोक की मांग संबंधी याचिका सुनवाई के लिए हाईकोर्ट पहुंची।
फिल्म एमएसजी के हरियाणा और यूटी में प्रदर्शन पर रोक की मांग को लेकर मोहाली के कलगीधर सेवक जत्थे के अध्यक्ष जेपी सिंह की ओर से दायर याचिका शुक्रवार को जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच के समक्ष पहुंची। इसके साथ ही एक अन्य केविएट याचिका भी सुनवाई के लिए बेंच के समक्ष आई। एडवोकेट आशुतोष कौशिक के माध्यम से यह केविएट राम रहीम ने पहले से दाखिल कर रखी थी। बहरहाल बेंच ने यह मामला संबंधित बेंच के समक्ष ही सुनवाई के लिए भेज दिया।
याचिकाकर्ता जेपी सिंह के आरोप
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता जेपी सिंह ने आरोप लगाया था कि दुराचार और कत्ल केस में फंसा कोई व्यक्ति भगवान का संदेश वाहक (मैसेंजर ऑफ गॉड) कैसे हो सकता है? एडवोकेट नवीन सैणी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि गुरू ग्रंथ साहिब, भगवत गीता, कुरान शरीफ, व बाइबिल जैसी पुस्तकों के अलावा महान गुरुओं को भगवान का संदेश वाहक माना जा सकता है, लेकिन आपराधिक मामलों में फंसा व्यक्ति संदेश वाहक नहीं हो सकता है।
दलील दी गई है कि हालात बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर पंजाब सरकार ने राज्य में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाई है। फिल्म को लेकर हरियाणा में भी विरोध हो रहा है और चंडीगढ़ में भी स्थिति बिगड़ने की आशंका है, क्योंकि इससे सिख धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी। लिहाजा, हरियाणा और चंडीगढ़ में प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए।
क्या है केविएट याचिका
केविएट का मतलब है कि यदि कोई व्यक्ति अदालत में याचिका दायर करता है तो प्रतिवादी का पक्ष जरूर सुना जाए। फिल्म एमएसजी को लेकर डेरा मुखी की ओर से दायर केविएट के सीधे मायने हैं कि उन्हें फिल्म के खिलाफ याचिका की आशंका थी। विरोध में दायर याचिका पर सुनवाई के वक्त डेरा सच्चा सौदा प्रमुख की ओर से केविएट के जरिए पक्ष रखा जा सकेगा।