रक्षाबंधन पर पंच महा जयंती योग बन रहा है। रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा के दिन 19 अगस्त सोमवार को है। रक्षाबंधन के दिन 60 वर्षों के बाद शोभन योग, सवार्थ सिद्धि योग, सिद्धि योग, रवि योग और जयंती योग बन रहा है। चंडीगढ़ में सूर्योदय सुबह 5 बजकर 55 मिनट पर है इसलिए यह योग सूर्योदय के उदय काल में उदयातिथि में पड़ रहा है। ये बातें सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहीं।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर सोमवार को सूर्योदय से लेकर दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक पाताल की भद्रा रहेगी इसलिए रक्षाबंधन का त्योहार दोपहर डेढ़ बजे के बाद होगा। सूर्योदय के समय मकर राशि में चंद्रमा हैं। ये शाम 6 बजकर 59 मिनट तक रहेंगे। यदि मकर राशि में चंद्रमा हो तो भद्रा का निवास पाताल में होता है।
यह है शुभ मुहूर्त
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि भ्रदा के खत्म हो जाने के बाद दोपहर डेढ़ बजे के बाद शाम सात बजे तक रक्षाबंधन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। धर्म शास्त्र के अनुसार सनातन धर्म में पंचांग शास्त्र के अनुसार दिन, तिथि, योग, नक्षत्र और भद्रा का विशेष प्रभाव होता है। पंचांग के इन्हीं पांच अंगों से किसी भी त्योहार का निर्धारण होता है। पाताल में भद्रा होने से शुभ कार्य करने पर धन का आगमन होता है। यदि स्वर्ग में भद्रा हो तो शुभ कार्य किया जाए तो शुभ माना गया है लेकिन मृत्यु लोक में भद्रा हो तो कार्य करने पर सभी कार्य नाश होता है। उन्होंने कहा कि मुहूर्त संहिता ग्रंथों में भद्रा के मुंह को अशुभ और पूंछ को शुभ माना गया है इसलिए स्पष्ट है कि भद्रा के मुख मात्र को अशुभ और शेष भाग को शुभ मानने वाला नियम केवल विशेष परिस्थिति में करने का विधान है।
भद्रा के पूंछ काल में कर सकते हैं रक्षा बंधन
श्री देवालय पूजक परिषद के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो 19 अगस्त को सुबह 9 बजकर 51 मिनट से 10 बजकर 54 मिनट तक भद्रा के पूंछ काल में रक्षाबंधन कर सकते हैं। इसके बाद सुबह 10 बजकर 54 बजे से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक भद्रा का मुख काल है। इस काल में रक्षाबंधन करना अशुभ है।