स्थानीय कैंट रेलवे स्टेशन पर रेल यात्रियों को पीने के लिए बोतल बंद दूषित पानी ही मयस्सर हो रहा है। आलम यह है कि यहां मिनिरल वॉटर के नाम पर गोरखधंधा चरम पर है। यात्रियों की शिकायत है कि उन्हें रेलवे स्टेशन पर मांग के बावजूद प्रमाणित ब्रांड का बोतल बंद पानी नहीं मिलता। और तो और दूषित पानी के बदले उनसे मनमानी कीमत वसूली जा रही है।
रेलवे स्टेशन पर जारी इस अंधेरगर्दी में प्लेटफार्मों पर मौजूद स्टॉल संचालकों की अहम भूमिका है। यात्रियों की मानें तो स्टॉल पर कार्यरत उनके कारिंदे यात्रियों को लोकल ब्रांड का बोतलबंद पेयजल ही बेच रहे हैं। जबकि लोकल ब्रांड के पानी की शुद्धता की कोई प्रमाणिकता नहीं है। रविवार को अमर उजाला की टीम जब यात्रियों की इस परेशानी से वाकिफ हुई, तो स्टॉल संचालक चुप्पी साधे नजर आए।
इस बीच यात्रियों ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर लोकल ब्रांड वाला बोतलबंद पानी भी 15 से 20 रुपये प्रति बोतल के हिसाब से उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि रेलवे स्टेशन पर प्रमाणित ब्रांड वाले पानी की बोतल का रेट 15 रुपये निर्धारित है। इस बीच स्टॉल मालिक या उनके कारिंदों से मांग करने पर भी उन्होंने प्रमाणित ब्रांड वाले बोतल बंद पेयजल को देने से इंकार कर रहे हैं।
श्रीनगर निवासी रेल यात्री आरिफ वानी से बताया कि लोकल ब्रांड वाली पानी की बोतल भी उन्हें 20 रुपये मिली है। वहीं अहमदाबाद से जम्मू जा रहे फारूख ने बताया कि यहां आईआरसीटीसी की ओर से रेलवे स्टेशनों पर बेचे जाने वाले बेतलबंद पेय की मांग करने के बावजूद स्टॉल संचालकों ने इसे देने में असमर्थता जताई। उधर, जब इस मसले पर रेलवे के अधिकारियों से जानकारी हासिल करने का प्रयास किया गया तो अधिकारी भी कुछ न बोल सके।