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राहुल के सामने बाजवा छाए, कैप्टन दरकिनार

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पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप बाजवा को मजबूत बनाने के लिए सह प्रभारी हरीश चौधरी की लिखी पटकथा कामयाब रही। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कार्यक्रम के दौरान बाजवा का पलड़ा भारी रहा। उम्मीद के मुताबिक कैप्टन अमरिंदर सिंह उपेक्षित रहे।
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कैप्टन की बयानबाजी से नाराज चौधरी ने कार्यक्रम की योजना इस तरह बनाई गई थी कि कैप्टन को साइडलाइन किया जा सके। संचालन की कमान चौधरी के पास थी। कैप्टन को सिर्फ एक ही मीटिंग में बुलाया गया। यह पहले से तय था कि उस मीटिंग में सिर्फ राहुल ही बोलेंगे। उनके अलावा कोई दूसरा नहीं बोलेगा।

बाकी दो मीटिंग में कैप्टन को बुलाया ही नहीं गया। कैप्टन सिर्फ विधायकों, सांसदों व प्रदेश पदाधिकारियों की मीटिंग में मंच पर थे। मंच संचालक हरीश चौधरी ने कहा कि अब राहुल बोलेंगे, उसके बाद कुछ और लोगों को भी बोलने का मौका दिया जाएगा। लेकिन राहुल भाषण देने के बाद लोगों से मिलने चले गए और मीटिंग खत्म कर दी गई।
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बाजवा गुट के सवाल पर राहुल चुप

आखिरी मीटिंग किसानों की थी, उसमें सीएलपी लीडर सुनील जाखड़ को बुला लिया गया, लेकिन कैप्टन को नहीं बुलाया गया। कैप्टन करीब तीस मिनट तक बाहर ही खड़े रहे।

मीटिंग खत्म होने के बाद राहुल से मिलकर वे वापस गए। राहुल ने भी न तो जिस मीटिंग में कैप्टन थे, उसमें एक बार कैप्टन को बोलने के लिए कहा। न ही जिन दो मीटिंग में कैप्टन नहीं थे, उनमें बुलाने को कहा। हालांकि बाजवा गुट की उम्मीदों के मुताबिक राहुल ने प्रधानगी को चुनौती देने वालों पर कार्रवाई जैसी कोई बात नहीं की।

जबकि, बाजवा गुट के लोगों ने इस पर सवाल भी किया, लेकिन राहुल चुप रहे। उन्होंने सिर्फ एकजुटता की बात कही, यह एक बार भी नहीं कहा कि प्रदेश नेतृत्व को चुनौती देने वालों पर कार्रवाई होगी।

कांग्रेसियों को एकजुटता का पाठ पढ़ाया

दो गुटों में बंटे पंजाब के कांग्रेसियों को पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एकजुटता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस ही कांग्रेस को हराती है, वरना हमें कोई हरा नहीं सकता।

साथ ही आगाह किया कि अगर अब भी इकट्ठे होकर नहीं चले तो फिर विपक्ष में ही बैठोगे। राहुल ने वीरवार को कांग्रेस भवन में तीन बैठकों को संबोधित किया। हर बैठक में उनका संबोधन और तेवर श्रोताओं के मुताबिक रहे। सबसे अहम बैठक सूबे के सीनियर नेताओं की थी।

इसमें प्रदेश कमेटी के पदाधिकारी, पूर्व प्रदेश प्रधान, एआईसीसी मेंबर, मौजूदा और पूर्व विधायक और सांसद शामिल हुए। सूबे में कांग्रेस को मजबूत करने का दारोमदार इन्हीं लोगों पर है। मंच पर राहुल के साथ दोनों दिग्गज, प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा और लोकसभा में उप नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह बैठे थे तो नीचे दोनों के समर्थक मौजूद थे।

लगातार हार और फूट का दर्द भी झलका

बाजवा और कैप्टन दोनों दिग्गजों की मौजूदगी में ही राहुल ने उनके समर्थकों को साफ शब्दों में संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में एकता की जरूरत है, संगठन को मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

आठ मिनट के भाषण के दौरान पंजाब में लगातार हार और फूट का दर्द भी झलका। उन्होंने कहा कि नशे, किसानों, वर्करों पर परचे जैसे कई मुद्दे हैं, जिन्हें सदन से सड़क तक उठाया जाना चाहिए। इसी मीटिंग के दौरान राहुल ने यह भी साफ किया कि सरकार बनने पर वर्करों की सुनवाई नहीं होती।

उन्होंने कहा कि सीएम बनने के बाद वर्करों को कोई पूछता तक नहीं है। राहुल ने सीनियर्स को यह भी साफ कर दिया कि कोई विधायक हो या सांसद, उसे संगठनात्मक मीटिंग में आना ही पड़ेगा। इस मीटिंग में मंच पर पंद्रह लोगों को बिठाया गया था, जिनमें पूर्व प्रधान, सांसद व अन्य बड़े नेता शामिल थे।
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बाजवा के खिलाफ बोलने से बचे कैप्टन

ज्यादातर विधायक कैप्टन गुट के हैं, लेकिन इस मीटिंग में किसी को बोलने का मौका नहीं दिया गया। राहुल की क्लास का असर तुरंत ही नजर आया।

मीटिंग के बाद बाहर निकलने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह, अपने धुर विरोधी प्रताप बाजवा के खिलाफ बोलने से बचते रहे। उनके समर्थकों का आरोप था कि मीटिंग में सिर्फ बाजवा समर्थकों को ही बोलने दिया गया।

कैप्टन ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। मीटिंग के बारे में पूछने पर भी उन्होंने इतना ही कहा कि इस बारे में पीपीसीसी ही ब्रीफ करेगी।
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