करनाल। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज सोमवार को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान वहां मिलीं भारी अनियमितताओं की वजह से भड़क गए।
उन्होंने सिविल सर्जन डॉ. वंदना भाटिया का ट्रांसफर, सेनेटरी इंस्पेक्टर तिलकराज को सस्पेंड और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. योगेश शर्मा समेत दर्जनभर डाक्टरों से जवाब तलब कर लिया। पांच पैरामेडिकल स्टाफ से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। विज ने खुद छत पर जाकर पानी की टंकियां चेक की और वहां काई जमा होने पर पानी के सैंपल भरवाए। उन्होंने निर्माण सामग्री के भी सैंपल भरवाए।
साथ ही दवाओं के स्टाक की जांच के आदेश और नशा मुक्ति केंद्र का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया। विज के अस्पताल में रहने के दौरान पूरे स्टाफ में हड़कंप मचा रहा। सोमवार सुबह 11.30 बजे स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अचानक छापा मारा।
उन्होंने ओपीडी का हर रूम चेक किया और मरीजों से बात की। चार मंजिला भवन के हर विभाग में गए और सभी के हाजिरी रजिस्टर चेक किए। यहां खामियां पाए जाने पर उन्होंने मौके पर ही सीएमओ डॉ. वंदना भाटिया का तबादला कर दिया। हालांकि, सीएमओ ने अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन मंत्री ने कहा, ट्रांसफर, ट्रांसफर मतलब ट्रांसफर। मंत्री अस्पताल की छतों पर रखी पानी की टंकी देखने भी पहुंच गए।
तीन पानी की टंकियों से तो ढक्कन ही गायब थे। पानी में जमी काई ने मंत्री का गुस्सा इतना बढ़ा दिया कि उन्होंने मौके पर सेनेटरी इंस्पेक्टर तिलकराज को सस्पेंड कर दिया और डिप्टी सुपरिंटेेंडेंट डॉ. योगेश शर्मा से स्पष्टीकरण मांग लिया। उधर, ब्लड बैंक मामले की शिकायत के मामले में जब अनिल विज डायरेक्टर से बात कर रहे थे तो बीच में सिक्योरिटी इंचार्ज बोल पड़े, उनको भी विज ने जमकर झाड़ लगाई।
तो क्या बाजार में बिकती हैं सरकारी दवाइयां
विज ने टीबी सेंटर और अस्पताल की डिस्पेंसरी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यहां भी हाजिरी रजिस्टर और दवा का स्टाक चेक किया। मंत्री ने डिस्पेंसरी इंचार्ज पुनीत से जब पूछा कि जो दवाइयां एक्सपायर हो जाती हैं, उनका आप क्या करते हैं तो इंचार्ज ने कहा कि सर पिछले तीन साल से कोई दवा एक्पायरी नहीं हुई। इस पर मंत्री भड़क गए और कहा कि तो क्या बाजार में जा रही हैं दवाइयां। आखिर क्यों इनका रिकार्ड नहीं है और ऐसा कतई ही नहीं हो सकता कि पिछले तीन साल से कोई दवा एक्पायर ही न हुई हो। उन्होंने तुरंत इस मामले की जांच के आदेश दिए और इंचार्ज से स्पष्टीकरण मांगने के आदेश दिए। साथ ही सिट्राजीन की सिरीप देखने पर भी मंत्री ने कहा कि यह दवा अगर बच्चा ज्यादा पी ले तोे उसके दिमाग असर पड़ता है, इसलिए पता करें कि गोली की बजाय यह सिरीप किसने मंगवाई और किसने यह रिकमेंड की?
मंत्री को ये मिलीं खामियां
- दवा बाहर की लिखी जाती हैं
- समय पर नहीं पहुंचते डाक्टर
- हाजिरी रजिस्टर में चलती है हेराफेरी
- अस्पताल में दूषित पानी पी रहे हैं लोग
- मेडिकल वेस्ट के निपटान में नहीं हो रहा नियमों का पालन
- अस्पताल में ढंग से सफाई नहीं होती
- डिस्पेंसरी में दवा के स्टाक भी खामियां मिली
- पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला
- नर्स व अन्य स्टाफ ड्रेस में नहीं मिला
- जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के खाने पड़ते हैं धक्के
- नशा मुक्ति केंद्र में एक माह में एक मरीज मिला, पूरा रिकॉर्ड तलब
डॉट मतलब फरलो
दोपहर एक बजे स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के कार्यालय पहुंचे और यहां पर डॉक्टरों की हाजिरी चेक की। रजिस्टर चेक किया तो इसमें हाजिरी की जगह पेन से केवल एक डॉट लगाई हुई थी। पिछले दिनों की हाजिरी भी चेक की तो ज्यादातर रजिस्टर में कई डॉक्टरों व कर्मचारियों की हाजिरी की जगह डॉट ही लगी मिली। इस पर मंत्री ने 11 डॉक्टरों और पांच पैरामेडिकल कर्मचारियों की पूरी रिपोर्ट मांगी।
मंत्री ने नहीं पिया पानी
तीन घंटे तक चले निरीक्षण में मंत्री ने तो अस्पताल की चाय पी और न ही पानी। दो बार अस्पताल कर्मचारी मंत्री के सामने पानी लेकर आए, लेकिन मंत्री ने साफ इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ये पानी टंकी का है। इस पर पानी की बोतल मंगाई गई, लेकिन वो पानी भी मंत्री ने नहीं पिया। सुबह 11.30 बजे 2.30 बजे तक चेकिंग करने के बाद वे यहां से रेस्ट हाउस के लिए निकले।
मैं कर दूंगा डॉक्टरों का इलाज
चेकिंग के बाद अनिल विज ने कहा कि अस्पताल में भारी खामियां हैं। यहां पर मिलीभगत से लापरवाही बरती जा रही है, अधिकारी डॉक्टरों को सपोर्ट कर रहे हैं। जानबूझकर दवाएं बाहर की लिखी जा रही हैं। वे दोबारा से इस अस्पताल की जांच करेंगे और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। जिस प्रकार से यहां पर एक सीएमओ है और एक डायरेक्टर है, लेकिन अस्पताल में कुछ भी ठीक नहीं है, ऐसे में इस अस्पताल का तो रब ही रखवाला है, लेकिन इसे ठीक करने के लिए रब ने मुझे भेज दिया है। अगर जल्द ही समस्याएं दूर नहीं हुई तो मैं डॉक्टरों का इलाज कर दूंगा।