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फोटोग्राफी के क्षेत्र के पितामह थे रघुराय: गुरदीप धीमान

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चंडीगढ़। रघु राय जी का जाना केवल एक महान फोटोग्राफर का निधन नहीं, बल्कि एक ऐसी दृष्टि का शांत अवसान है, जिसने हमें देखने का नया तरीका सिखाया। उन्होंने फोटोग्राफी को केवल छवियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे संवेदना, सच्चाई और मानवीय जुड़ाव का माध्यम बनाया। यह बात पंजाब ललित कला अकादमी के अध्यक्ष और विजुअल फोटोग्राफर गुरदीप धीमान ने कही है। धीमान ने कहा कि वे कई बार उनसे मिलने का मौका मिला। यह मेरा सौभाग्य है।
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उन्होंने कहा कि वे कम बोलते थे, लेकिन हर मुलाकात में गहराई होती थी। जब भी मैं उन्हें अपना काम दिखाता, वे पूरे स्नेह और ईमानदारी से उसे देखते और उनके सरल शब्द तुम बहुत अच्छा काम कर रहे हो, मेरे लिए हमेशा प्रेरणा बने। जब भी मैं उनसे मिला, उन्होंने स्नेहपूर्वक गले लगाया और उनके आस-पास की सकारात्मक ऊर्जा ने हर बार एक अलग ही सुकून दिया।
उनके कार्यों को देखने से प्रेरणा मिलती है। चाहे भोपाल गैस त्रासदी या बंगलादेश के विस्थापित परिवार। उनके कैमरे बोलते थे। चंडीगढ़ में उनका स्लाइड प्रजेंटेशन हुआ था। वर्ष 2011 से उनसे मिलना शुरू हआ। वर्ष 2017 में उनका टॉक शो हुआ था। चंडीगढ़ में फोटोग्राफी के क्षेत्र के कार्यक्रमों में आते रहते थे।
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रघुराय कई बार चंडीगढ़ आए। पंजाब ललित कला अकादमी या चंडीगढ़ ललित कला अकादमी या अन्य कार्यक्रम हों। उन्होंने कई बार टॉक शो किया। उन्होंने फोटोग्राफी के गुर सिखाए। वे हमेशा सरल रहते थे। वे हमेशा शांत होकर काम किया। हर बार अलग सोच के साथ काम करने को प्रेरित करते थे।
आज, जब हम उनके जाने का शोक मना रहे हैं, यह विश्वास भी उतना ही गहरा है कि उनकी दृष्टि और उनकी सीख हमेशा हमारे साथ रहेगी। जब भी हम कैमरा उठाएँगे, उनका देखने का अंदाज हमें ईमानदार और संवेदनशील बने रहने की प्रेरणा देता रहेगा।
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