चंडीगढ़। पीजीआई में नवजात की पहचान और जेंडर को लेकर परिवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मनीमाजरा निवासी 22 वर्षीय कोमल को 17 अगस्त को प्रसव के लिए पीजीआई में भर्ती कराया गया था। परिवार का दावा है कि 18 अगस्त को डिलीवरी के बाद डॉक्टरों और स्टाफ ने नवजात को लड़का बताया। परिवार के अनुसार पीजीआई के दस्तावेजों में भी नवजात का जेंडर मेल दर्ज किया गया था।
परिवार का कहना है कि पीजीआई में नवजात के लिए सीट या बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। इसके बाद 18 अगस्त की रात बच्चे को मोरिंडा स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया। आरोप है कि 19 अगस्त को वहां डॉक्टरों ने नवजात को लड़की बताया। इसके बाद परिवार ने पीजीआई प्रशासन से संपर्क किया।
शिकायत के अनुसार, पीजीआई ने नवजात को वापस बुलाया और 20 अगस्त की सुबह उसे दोबारा अस्पताल लाया गया। परिवार का आरोप है कि वहां बच्चे की हालत गंभीर बताई गई और जेंडर को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने की बात कही गई। बाद में नवजात की मौत हो गई।
पिता ने रिकॉर्ड और सीसीटीवी सुरक्षित रखने की मांग की
नवजात के पिता लकी कुमार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने पीजीआई और निजी अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, पहचान टैग, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित स्टाफ के ड्यूटी रोस्टर सुरक्षित रखने की मांग की है। परिवार ने डीएनए और फॉरेंसिक जांच की भी मांग उठाई है।
कोट
उच्च अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी तरह की लापरवाही या चूक सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।- पीजीआई प्रवक्ता