चंडीगढ़। बीते शनिवार को जिला अदालत में हुए गोलीकांड से यहां कार्यरत मध्यस्थों (वकीलों) की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरुणवीर वशिष्ट ने मध्यस्थों के साथ सुरक्षा के मुद्दे पर बैठक की। इस दौरान मध्यस्थों ने अपने सुझाव दिए। कहा कि इतने बड़े गोलीकांड के बाद सर्विस ब्लॉक में सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही एंबुलेंस की सुविधा और आसपास पीसीआर की तैनाती भी होनी चाहिए। इसके अलावा सुरक्षा के लिए दो नायब कोर्ट (एक महिला और एक पुरुष) वर्दी में तैनात होने चाहिए।
बता दें कि मीडिएशन सेंटर में शहर के सरकारी हॉस्पिटल से मनोवैज्ञानिक (डॉक्टर) भी यहां आते हैं। मीडिएशन सेंटर में पारिवारिक विवाद, वैवाहिक विवाद, दहेज प्रताड़ना, घरेूल हिंसा से जुड़े मामले व बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामले की सुनवाई होती है। इनमें कोर्ट से रेफर होने वालें केसों समेत वुमन पुलिस थानों के केस भी शामिल हैं। बीते शनिवार जब यहां वारदात हुई थी तब सर्विस ब्लॉक के पीछे एक पुरानी खराब एंबुलेंस ही थी। ऐसे में एक वकील अपनी कार में हरप्रीत को पीजीआई लेकर गया था। स्ट्रेचर की भी सुविधा नहीं है। जानकारी के मुताबिक, कोर्ट में 40 से 50 मध्यस्थ हैं। बता दें कि 3 अगस्त की घटना के बाद भी सर्विस ब्लॉक फिलहाल कोई सुरक्षा नहीं है।