चंडीगढ़। सेक्टर-9 की हरी-भरी झाड़ियों में नवजात बच्ची की खामोश आंखों ने जो दर्द बयां किया, वह दिल को झकझोर देने वाला है। इन आंखों में एक ही सवाल था मां, पालना नहीं था तो जन्म ही क्यों दिया?
इस बच्ची की कहानी सिर्फ एक बच्ची की दर्दनाक मौत नहीं है बल्कि यह इंसानियत पर एक गहरा सवाल है। जिस मां ने उसे जन्म दिया, उसने नए कपड़े पहनाए, लेकिन फिर उसी मासूम को मरने के लिए झाड़ियों में छोड़ दिया। वह नन्ही जान पूरी रात तड़पती रही, जानवर उसके कोमल शरीर को नोचते रहे और कीड़े-मकोड़े रेंगते रहे। जब पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर उसके चेहरे से कपड़ा हटाया, तो मंजर इतना भयावह था कि पुलिस अधिकारियों की आंखें छलक पड़ीं। बच्ची की नाक नोची हुई थी। इस घटना से हर कोई स्तब्ध है कि आखिर कोई कैसे अपने कलेजे के टुकड़े को इस तरह छोड़ सकता है।
पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। जल्द ही आरोपियों को पकड़ने का दावा कर रही है। महिला डॉक्टर भी बच्ची का चेहरा देखकर सहम गई। खुद एसएसपी कंवरदीप कौर भी इस घटना से भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक बच्ची की मौत नहीं, बल्कि इंसानियत के लिए एक गहरा सवाल है।
इससे पहले भी शहर में ऐसी अमानवीय घटनाएं हो चुकी हैं। बीते फरवरी महीने में दड़वा की गली नंबर एक में कूड़े के लिफाफे में एक चार महीने का भ्रूण मिला था और इससे पहले किशनगढ़ में कड़ाके की ठंड में एक नवजात को खुले में छोड़ दिया गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।