ये हैं 6 सवाल...
1. क्या यूटी प्रशासन अपने बिजली विभाग को निजी हाथों में दे रहा है?
2. क्या विभाग लाभ में है? राजस्व की जानकारी दी जाए।
3. पिछले तीन साल में खर्च व कमाई की जानकारी मुहैया कराएं।
4. एग्रीगेट तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान की जानकारी दी जाए।
5. ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन लॉस की जानकारी मुहैया कराई जाए।
6. अगर विभाग फायदे में चल रहा है तो इसका निजीकरण क्यों किया जा रहा है? ये भी बताएं।
दौड़ में अडानी समेत सात कंपनियां
बिजली विभाग को खरीदने के लिए जिन सात कंपनियों ने बोली जमा कराई है, उनमें अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड, टाटा पावर, टोरेंट पावर, स्टेरेलाइट पावर, रिन्यू विंड एनर्जी, एमीनेंट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड और एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड हैं। सोमवार को कंपनियों की ओर से जमाई कराई तकनीकी बोली को खोला गया है। अब मूल्यांकन समिति की ओर से आवेदनों की जांच की जाएगी, जिसके बाद वित्तीय बोली खोली जाएगी। इसमें जिसकी बोली सबसे ज्यादा होगी, उसे मंजूरी के लिए प्रशासन केंद्र सरकार के पास भेजेगा।
सरकार की ओर से जिस भी कंपनी को नियुक्त किया जाएगा, उसके पास शहर में बिजली वितरण और रिटेल सप्लाई की जिम्मेदारी होगी। पहले कुल 20 कंपनियों ने बिजली विभाग को खरीदने की इच्छा जताई थी, लेकिन बोली में सिर्फ सात कंपनियां ही शामिल हुई थीं। हालांकि, पिछले कई महीनों से विभाग के कर्मचारियों की ओर से निजीकरण का विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।