बुल्गारिया के लोक परिवेश और पौराणिक सभ्यता को टैगोर थिएटर में पपेट शो के माध्यम से पेश किया बुल्गारिया के कलाकारों ने। टुंबा लुंबा ढोल की लय और ध्वनि का एक शब्द चित्र है।
डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर यूटी चंडीगढ़ और टैगोर थिएटर सोसाइटी द्वारा आयोजित पांच दिवसीय पपेट शो के आखिरी दिन बुल्गारिया के कलाकारों ने पपेट शो टुंबा लुंबा पेश किया।
40 मिनट के पपेट शो को 11 छोटी-छोटी कहानियों में पेश किया गया। हर एक कहानी में संगीत के माध्यम से बुल्गारिया में हुए बदलाव को दर्शाया गया। इसकी खास बात इसमें भाग लेने वाले चार कलाकार थे।
उन्होंने अलग-अलग मास्क पहन कर कुल 40 पपेट का रोल निभाया। पपेट को बुल्गारिया फोक म्यूजिक के साथ बेहतरीन तरीके से पेश किया गया। इसका लेखन और निर्देशन हरिस्टीना अर्सेनोवा ने किया।
स्कनोग्राफी एमीलियाना टोटेवा ने की। पपेट के रूप में निदिलीना रोसिलीनोवा, रुमायना करालेवा, डीआन रूसेव और र्जीओजी मिनकोव थे।
बुल्गारिया में फेमस नहीं पपेट शो: हरिस्टीना
टुंबा लुंबा पपेट शो की डायरेक्टर हरिस्टीना अर्सेनोवा ने शो से पहले हुई बुल्गारिया और खुद से जुड़ी कुछ बातें बताईं। हरिस्टीना ने कहा कि बुल्गारिया बहुत छोटा देश है, जहां की आबादी बहुत कम है। इसलिए वहां पपेट शो बहुत ज्यादा प्रसिद्ध नहीं है।
बुल्गारिया में पपेट शो को बच्चों का खेल माना जाता है। इसलिए उन्होंने इसे एक मुकाम दिलाने के लिए प्रयास करना शुरू किया। इस प्रोफेशन में 12 वर्ष से इस काम से जुड़ी हूं और टीम में जो लोग हैं, वह भी थिएटर से पासआउट स्टूडेंट हैं।
ये पिछले कई वर्षों से हमारे साथ जुड़े हैं। टुंबा लुंबा का अर्थ है ड्रम से निकली हुई आवाज, जिससे पूरे शरीर में सिहरन पैदा होती है और मन नाचने को करता है। यह एक ऐसा भाव है जिसको जीवन का संगीत कह सकते हैं।