मशहूर पंजाबी साहित्यकार अजमेर औलख नहीं रहे
पंजाबी के प्रसिद्ध नाटककार और उपन्यासकार अजमेर औलख का वीरवार सुबह देहांत हो गया। वे काफी समय से कैंसर से जूझ रहे थे। 75 वर्षीय औलख ने अपने मानसा स्थित घर में ही अंतिम सांस ली। 16 जून शुक्रवार को मानसा में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
अजमेर औलख को साल 2008 में कैंसर की बीमारी का पता चला था, जिसके चलते उनकी रीड की हड्डी में तकलीफ शुरू हो गई थी। अमजेर सिंह औलख पिछले एक महीने से फोर्टिस अस्पताल में भर्ती थे और एक हफ्ता पहले ही डिस्चार्ज हुए थे।
सिद्धू ने अपनी जेब से दिया था 8 लाख का चेक
मशहूर पंजाबी साहित्यकार अजमेर औलख नहीं रहे
विशेष उल्लेखनीय है कि काफी समय से कैंसर से जूझ रहे औलख के इलाज में आया 8 लाख रुपये का बिल पंजाब कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी जेब से भरा था। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी उनका हाल चाल जाना था।
वहीं हाल ही में सेहत मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने ऐलान किया था कि सरकार उनके इलाज का सारा खर्च वहन करेगी। साथ ही अस्पताल को निर्देश दिया था कि वे उनके इलाज का बिल सीधा सरकार को भेजें। महिंद्रा खुद निजी तौर पर औलख का हाल जानने को अस्पताल गए थे।
साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था
मशहूर पंजाबी साहित्यकार अजमेर औलख नहीं रहे
अजमेर सिंह औलख पंजाबी भाषा के विख्यात साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक नाटक इश्क बाझ नमाज़ दा हज नाही के लिये उन्हें सन् 2006 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। औलख का जन्म 19 अगस्त 1942 को पंजाब के मानसा जिले के गांव कुंभड़वाल में हुआ था।
उनके पिता का नाम श्री कौर सिंह और माता का नाम श्रीमती हरनाम कौर था। वह एक आदर्श अध्यापक थे। वह पंजाब के जाने माने नाटककार थे और अपने जीवन के अंत समय तक नाटक खेलते रहे। 15 जून 2017 कैंसर की बीमारी के चलते वे दुनिया छोड़कर चले गए।