‘इराक में आतंकवादी हमारे और करीब पहुंच रहे हैं। हम इस वक्त इराक के शहर नजफ में हैं। हमारे पासपोर्ट कंपनी फोर डिमेंशन ने जब्त कर रखे हैं। यहां कर्मचारी भी कंपनी छोड़ जान बचाकर भाग चुके हैं।
हमें पिछले पांच माह से वेतन नहीं मिला। इसलिए हम चाहकर भी भारत नहीं आ पा रहे हैं।’ यह कॉल 19 जून को पटियाला के गांव दुल्लदी निवासी सुरजीत के फोन पर आई। फोन सुनते ही घर में सन्नाटा पसर गया। सुरजीत सिंह के दो बेटे और एक बेटी है। उनका मंझला बेटा मलकीत अब इराक में अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है।
सुरजीत सिंह ने बताया कि उसका बेटा अगस्त 2013 को इराक में नौकरी करने के लिए गया था। उन्हें लगता था कि उनका बेटा विदेश में सेटल हो जाएगा तो उससे परिवार को भी कुछ सहारा रहेगा। उनका बेटा बताता था कि उसे वेतन नहीं मिल रहा। इस पर उसे इंतजार करने के लिए कहा जाता था ताकि वो नौकरी छोड़कर वापस न लौट आए। बेटे ने जब फोन किया था तो वो काफी घबराया हुआ था। उसके साथ खतौली और देवीगढ़ के भी कुछ लड़के हैं। इन सभी की जान खतरे में है।
बंधक बनाए गए सारे नौजवान गरीब घरों से
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि नौजवानों के परिवार अपने फोन नंबर भी जरूर दर्ज करवाएं। इराक में अगवा किए गए भारतीयों के प्रति विधायक बलबीर सिंह सिद्घू ने चिंता जताई है।
उन्होंने कहा कि इराक में बंधक बनाए गए सारे नौजवान गरीब घरों से हैं। इनमें से कई अपने घरों का एकमात्र सहारा हैं। उनके परिवार के लोग सदमे में हैं।
विधायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि नौजवानों को तुरंत रिहा करवाया जाए। सिद्धू ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से भी विनती की है कि वह जल्द से जल्द इस मामले को केंद्र सरकार के सामने लाएं।
इराक में फंसे युवाओं के परिजनों के लिए कंट्रोल रूम
पंजाब सरकार ने इराक में अगवा किए गए राज्य के युवाओं के परिवारों के लिए मोहाली में कंट्रोल रूम बनाया है।
'आतंकी हमें कैंटर में भर रहे हैं, अब बचना मुश्किल'
इराक में 17 जून की रात आतंकियों के कब्जे में फंसने के बाद कमलजीत सिंह चुपके से फोन पर अपने भाई से इतने ही शब्द कह पाए थे।