पंजाब महिला आयोग की चेयरपर्सन मनीषा गुलाटी को शनिवार को सरकार ने उनके पद से हटा दिया है। पंजाब सरकार ने उनकी एक्सटेंशन को रद्द कर दी है। 40 दिन में यह दूसरा मौका है, जब सरकार ने उन्हें पद से हटाने के निर्देश दिए। हालांकि उनके कार्यकाल को खत्म होने में पांच महीने शेष थे।
सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास के एडिशनल सेक्रेटरी कृपा शंकर सरोज की तरफ से जारी नोटिफिकेशन कहा गया है कि गुलाटी को दिया गया सेवा विस्तार खत्म कर दिया गया है। इससे पहले 31 जनवरी को आप सरकार ने उन्हें इस पद से हटा दिया था। इस आदेश के खिलाफ वह हाईकोर्ट पहुंच गई थी, जिसके बाद पंजाब सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया था। उस दौरान सरकार ने नए सिरे से कानून के मुताबिक उनकी सेवा को जारी रखने की बात कही थी।
कैप्टन सरकार के समय किया गया था नियुक्त
कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में मार्च 2018 में मनीषा गुलाटी को पंजाब महिला आयोग की चेयरपर्सन नियुक्त किया गया था। साल 2020 में उनके कार्यकाल में तीन साल की बढ़ोतरी की गई थी। 20 फरवरी, 2022 को वह भी भाजपा में शामिल हो गई थीं। इसके बाद से ही उन्हें हटाने की कार्रवाई चल रही थी।
सरकार का फैसला सिर माथे - मनीषा गुलाटी
पंजाब सरकार के आदेश के बाद मनीषा गुलाटी ने कहा कि यह पंजाब सरकार का प्यार है। सरकार का फैसला सिर माथे पर है। वह जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखेंगी। उन्होंने कहा कि पद से हटने के बाद भी वह लोगों की सेवा करती रहेंगी।
डेढ़ महीने पहले शुरू हो गई थी हटाने की प्रक्रिया
आम आदमी पार्टी की सरकार ने मनीषा गुलाटी को उनके पद से हटाने के लिए करीब डेढ़ महीना पहले ही प्रक्रिया शुरू कर दी थी। फरवरी के शुरू में सरकार ने उन्हें हटाने संबंधी पहली बार नोटिफिकेशन जारी की थी। उस समय विभाग की ओर से मनीषा गुलाटी को जारी आदेश में कहा गया था कि पंजाब राज्य महिला आयोग अधिनियम 2001 (और आगे के संशोधन) में मौजूदा अध्यक्ष या आयोग के सदस्यों के विस्तार के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। चेयरपर्सन व सदस्यों का कार्यकाल तीन साल के लिए होता है। नियम के तहत जब भी चेयरपर्सन और सदस्यों के पदों को भरना होता है तो इसके लिए अखबारों में विज्ञापन देना होता है। इतने महत्वपूर्ण पद पर कोई भी व्यक्ति उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना नियुक्त नहीं किया जा सकता है। चेयरपर्सन की नियुक्ति के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री पंजाब की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी गठित करनी होती है। कमेटी में मुख्य सचिव और विभाग के प्रमुख सचिव मेंबर होंगे। यह कमेटी उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग करेगी। उसके बाद उम्मीदवार के चुनाव की फाइल मुख्यमंत्री को भेजेंगे। मुख्यमंत्री की तरफ से नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा। आदेश में लिखा है कि 18 सितंबर, 2020 को पत्र जारी करने से पहले समिति के सदस्यों की तरफ से कोई सिफारिश नहीं की गई थी। इसके अलावा महिला संगठनों से भी कोई सलाह नहीं की गई थी। हालांकि इसके बाद उन्होंने पंजाब-हरियाणा
हाईकोर्ट की शरण ली थी। अदालत में सरकार ने यूटर्न लेते हुए गुलाटी को हटाने संबंधी अपने आदेश को रद्द कर दिया था।