सोना उगलने वाले पंजाब के मालवा की धरती के पानी को खतरनाक और विषैली धातुएं अपने आगोश में लेने लगी हैं। केंद्र सरकार द्वारा लिए पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मालवा के कई जिलों के ग्रामीण इलाकों का पानी जहर बनने लगा है।
पानी में कई खतरनाक तत्वों की मात्रा, अधिकतम स्वीकार्य सीमा (मैक्सिमम परमिसिबल लिमिट) से कई गुणा अधिक पाई गई है। इन तत्वों की अधिक मात्रा कई गंभीर बीमारियों को दावत दे सकती है। केंद्र सरकार के वाटर सप्लाई और सेनिटेशन मंत्रालय ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत एक अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2015 तक सभी जिलों के गांवों में पानी के नमूने लिए।
इसकी रिपोर्ट हैरत में डालने वाली है। संगरूर, बरनाला, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब आदि जिलों के गांवों से लिए नमूनों में हैवी मैटल्स और अन्य खतरनाक तत्वों की मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई है। माना जा रहा है कि खेती के दौरान अत्यधिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग के चलते ऐसे हालात बने हैं। इसके अलावा गहरे तालाब और कुएं भी भूजल को दूषित कर रहे हैं।
संगरूर के अनदाना, भवानीगढ़, धूरी, लहरागागा, सुनाम, मालेरकोटला ब्लॉक के गांवों के पानी में यूरेनियम, फ्लोराइड, नाइट्रेट, एल्युमीनियम, यूरेनियम और आर्सेनिक ज्यादा मात्रा में पाए गए हैं। सुनाम के गांव रत्तोके के पानी में यूरेनियम की मात्रा 230 मिलीग्राम प्रति लीटर और गांव सिंगपुरा के पानी में 204 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है।
बरनाला के गांव दानगढ़, सेखां, विधाते में एल्युमीनियम और लैड, गांव अतरसिंह वाला और लोहगढ़ मौड़ में यूरेनियम पाया गया है। पटियाला के गांव मुंडखेड़ा, दयोगढ़, बख्शीवाला, बिशनगढ़, बिंजल, फरीदपुर, भूरे माजरा, छपराहर में एल्युमीनियम, सल्फेट और लैड की मात्रा कई गुणा ज्यादा मिली है।