जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि जिला कपूरथला के सुल्तानपुर लोधी कस्बे में चल रहे एक नामी अस्पताल ने इस साल करीब 1282 व्यक्तियों के इलाज के लिए कुल 4,43,98,450 रुपये का बीमा क्लेम किया गया, जिसमें से इस अस्पताल के 519 दावे रद्द हो गए और बाकी बचे मामलों में से कुल 4,23,48,050 रुपये के दावे स्टेट हेल्थ अथॉरिटी पंजाब द्वारा पास किए गए हैं।
पास हुई इस राशि 4,43,98,450 रुपये में से अब तक 1,86,59,150 रुपये की रकम की अदायगी बीमा कंपनी इफको टोकियो द्वारा अस्पताल को की जा चुकी है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नामी अस्पताल द्वारा योजना के तहत एक मरीज के इलाज के बदले उसके परिवार के अन्य व्यक्तियों का दाखिला अस्पताल में दिखा कर झूठे बीमा क्लेम हासिल किए गए हैं।
सरकार को 52 लाख का नुकसान
इसके अलावा जालंधर, होशियारपुर और कपूरथला जिले के 35 सरकारी अस्पतालों के 1,015 बीमा क्लेम के दावे इफको टोकियो हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने एक साल के दौरान रद्द किए हैं। इन रद्द हुए दावों की कुल राशि 52,06,500 बनती है। सरकारी अस्पतालों में किए गए इलाज के क्लेम रद्द होना भी अपने आप में हैरानी भरा है, क्योंकि सरकारी अस्पतालों में किए गए इलाज का क्लेम किसी व्यक्ति विशेष को न जाकर राज्य सरकार के खाते में जाता है।
इन अधिकारियों ने बरती लापरवाही
विजिलेंस जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि इफको टोकियो बीमा कंपनी द्वारा जालंधर, होशियारपुर और कपूरथला के कई सरकारी अस्पतालों के बीमा क्लेम जिला डिप्टी मेडिकल कमिश्नरों और सरकारी डॉक्टरों की लापरवाही के कारण भारी मात्रा में रद्द किए गए हैं। जिसका मुख्य कारण बीमा कंपनी द्वारा सरकारी अस्पतालों के क्लेम रद्द करके कम से कम राशि बतौर क्लेम सरकारी अस्पतालों के खातों में न डालना और अधिक से अधिक अनचाहा वित्तीय लाभ लेना हो सकता है।
बीमा कंपनी को मिलते हैं 1000 रुपये प्रति परिवार
पंजाब राज्य में आयुष्मान भारत योजना सरबत सेहत बीमा योजना के नाम चल रही है। इसके अनुसार लगभग 1000 रुपये की रकम राज्य सरकार की तरफ से बतौर प्रीमियम प्रति परिवार बीमा कंपनी को प्रति वर्ष दी जाती है। सरकार द्वारा परिवारों को स्मार्ट कार्ड जारी किए गए हैं। इसके द्वारा लाभार्थी को यदि कोई गंभीर बीमारी हो जाती है तो वह इस योजना से अस्पताल में दाखिल होकर 5,00,000 रुपये तक का इलाज मुफ्त करवा सकता है। योजना की निगरानी स्टेट हेल्थ अथॉरिटी, पंजाब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग कर रहा है।