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सराहनीय पहलः ब्लड बैंकों के लिए खून जुटाएगी पंजाब यूनिवर्सिटी और जीएमसीएच-32 चंडीगढ़

Mon, 20 Apr 2020 04:33 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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लॉकडाउन के चलते देशभर के ब्लड बैंकों में खून की भारी कमी हो गई है। रक्तदान शिविर न लगने की वजह से खून इन बैंकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसको लेकर केंद्र सरकार चिंतित है और राज्य सरकारों से खून जुटाने का आग्रह किया है। चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन समेत सभी अस्पतालों व पीयू को भी चिट्ठी आई है।
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इस पर जल्द से जल्द काम करने को कहा गया है। प्रथम कड़ी में पीयू ने 14 सदस्यों की कमेटी बना दी है। यह कमेटी जीएमसीएच सेक्टर- 32 अस्पताल का सहयोग लेगी। पहले चरण में यह बात सामने आ रही है कि पीयू के छात्रों के पास घर-घर जाकर खून लिया जा सकता है। हालांकि अभी कमेटी ने इस प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगाई है। खून एकत्रित करने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं।

चंडीगढ़ में आधा दर्जन से अधिक ब्लड बैंक हैं। इनमें भी खून की कमी महसूस होने लगी है। इसी तरह देशभर के अन्य ब्लड बैंकों का भी यही हाल है। कोरोना के मरीजों के अलावा तमाम गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी खून की हर दिन जरूरत पड़ रही है। साथ ही दुर्घटना आदि होने के बाद भी लोगों को खून की जरूरत पड़ती है।
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20 मार्च के बाद रक्तदान शिविर देशभर में नहीं लगाए गए। लगभग एक माह इसको हो गया। लाखों लोगों को अस्पतालों में खून की आवश्यकता महसूस हुई, उनको तो खून मिला लेकिन आगे आने वाले मरीजों के लिए दिक्कतें हो रही हैं। वीसी प्रो. राजकुमार को भी भारत सरकार व चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन से पत्र मिला है। उसके तुरंत बाद कमेटी बनाई गई है।

ये है 14 सदस्यीय कमेटी
इस कमेटी के चेयरमैन डीयूआई प्रो. शंकरजी झा बनाए गए हैं। डीएसडब्ल्यू प्रो. इमैनुअल नाहर, प्रो. नीना कप्लास, पुटा अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल, पीयूसीएससी अध्यक्ष चेतन चौधरी, उपाध्यक्ष राहुल, सचिव तेगबीर सिंह, ज्वाइंट सेक्रेटरी मनप्रीत सिंह माहल, डीसीडीसी, सीएमओ, प्रो. प्रशांत गौतम, डॉ. गौरव गौड़, डॉ. प्रवीन गोयल, डॉ. केशव मल्होत्रा व कुछ छात्र संगठन एसोसिएशन इसमें शामिल हैं।

यह कमेटी ऑनलाइन बैठक करके निर्णय लेगी कि यह खून कैसे एकत्रित किया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह निर्णय लिया गया है कि छात्रों के घरों तक पहुंचा जाए। आदेश यह भी हैं कि 50 से अधिक युवाओं को एकत्रित न किया जाए और शिविर लगाया जाए। पहले उनके स्वास्थ्य की जांच हो और रक्तदान किया जाए। सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहनी चाहिए।
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