‘कन्नक दी बल्ली’ में दिखाया लड़कियों का दर्द
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पंजाब यूनिवर्सिटी में रविवार को बलवंत गार्गी के नाटक ‘कन्नक दी बल्ली’ का मंचन हुआ। नाटक का निर्देशन रानी बलबीर कौर ने किया। नाटक में ऑनर किलिंग और छोटी जाति के लोगों के साथ हो रहे अत्याचारों को दिखाया गया। नाटक में कन्नक दी बल्ली शब्द का प्रयोग लड़कियों के लिए किया गया।
रानी बलबीर कौर ने बताया कि यह नाटक 30 वर्ष पहले खेला गया था, जिसमें किरण खेर और बलदेव ने भाग लिया था। नाटक का निर्देशन बीवी कारंत ने किया था। नाटक का सेट गांव की तरह तैयार किया गया था। पात्रों के कॉस्ट्यूम भी ग्रामीणों जैसे थे। नाटक की खासियत इसकेसब टेक्स्ट में थी, जिसमें निर्देशक ने नाटक को और रोचक बनाने के लिए नए सीन भी शामिल किए। नाटक की अवधि 2 घंटे और 15 मिनट की थी, जिसमें 35 कलाकारों ने भाग लिया। नाटक में चार बार शादी करवा चुके मघर के लिए रिश्ते लेकर आने वाली ताबा की भूमिका में वीरपाल कौर ने दर्शकों को खूब हंसाया।
नाटक की कहानी
कन्नक दी बल्ली तारो नाम की एक अनाथ और छोटी जाति की लड़की की कहानी है। जो कि बहुत खूबसूरत होती है। जिसका चाचा पैसों के लालच में उसे मघर नाम के एक बूढ़े आदमी को बेच देता है। मघर की पहले ही चार शादियां हो चुकी होती है। नाटक जहां तारो नाम की लड़की के दर्द को बयां करता है वहीं ठाकरी, निहाली जैसे महिला पात्रों के दुखों का भी साक्षी बनता है।