पंजाब यूनिवर्सिटी में सीआईआई चंडीगढ़ की वर्कशॉप
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पंजाब यूनिवर्सिटी में आयोजित सीआईआई वर्कशॉप में एनजीओ की विश्वसनीयता पर दिग्गजों ने खुलकर बातचीत की। गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) विश्वसनीयता की कमी का सामना कर रहे हैं और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ही इसका निराकरण करने का एकमात्र उपाय है।
एनजीओ को नवीनतम टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर देना चाहिए, ताकि वह अपने कार्यों में सफलता हासिल कर सके उक्त बातें भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से सेफ हैंड्स रीहैबिलिटेशन सोसायटी, डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन के साथ मिलकर पंजाब यूनिवर्सिटी में ‘एनजीओ- उद्योग क्षमता निर्माण और सतत कौशल विकास में भूमिका’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन सामने आईं।
सीआईआई चंडीगढ़ काउंसिल के पूर्व चेयरमैन अमरबीर सिंह ने कहा कि वर्तमान में एनजीओ तक पहुंच और उनकी विश्वसनीयता को बढ़ाने की आवश्यकता है। इस कार्यशाला का प्रयोजन एनजीओ को जमीनी स्तर पर काम करने के लिए प्रेरित करना तथा उन्हें सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से ई-एनजीओ प्रोग्राम का हिस्सा बनाना है।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने एनजीओ को डिजिटल टूल्स को समझने का सुझाव दिया और बताया कि आने वाले कल में यह बहुत जरूरी हो जाएगा। वर्तमान में भारत में काम करने वाली 5000 से अधिक एनजीओ ऐसी हैं जो ई-एनजीओ कार्यक्रम से जुड़ चुकी हैं और यह संख्या और तेजी से बढ़ रही है। कार्यशाला में ट्राइसिटी से करीब 75 एनजीओ के प्रतिनिधि मौजूद रहे।