दुनियाभर में मशहूर पाकिस्तानी कव्वाल अमजद फरीद साबरी की हत्या से कव्वाल जगत को कभी न पूरा होने वाला घाटा पहुंचा है। उनके प्रशंसक सदमे में हैं और उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए शोक जताया है। वे अपने अलग अंदाज व सूफ़ियाना गायकी के लिए जाने जाते थे। मशहूर साबरी ब्रदर्स ब्रांड को उनके पिता गुलाम फरीद साबरी और चाचा मकबूल ने बनाया था।
कव्वाली को उनके पिता और चाचा ने ही दुनिया भर में पहचान दिलाई थी। ऐसा कहा जा सकता है कि कव्वाली की कला उनकोविरासत में मिली थी। 45 वर्षीय अमजद साबरी पिछले वर्ष भारत में इसलिए चर्चा में आए थे, क्योंकि सलमान खान की फिल्म बजरंगी भाईजान में अपने पिता की कव्वाली के प्रयोग को लेकर उन्होंने कॉपीराइट का मुद्दा उठाया था।
परिवार की परंपरा को रखा कायम
अमजद साबरी के पिता का जन्म 1930 में अविभाजित पंजाब केरोहतक में हुआ था। बंटवारे केबाद वे परिवार समेत पाकिस्तान के कराची में शिफ्ट हो गए थे। अमजद साबरी ने विरासत में मिली कव्वाली की इस कला को कायम रखा था। साबरी ब्रदर्स ब्रांड की मशहूर कव्वालियों को उन्होंने अपने सुरों से सजाया था।
अमजद साबरी से मैं चंडीगढ़ में 1995 में मिला था। वे यहां एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। वे चिश्ती परंपरा के सूफी गायक थे। अपनी कला केजरिए उन्होंने दुनियाभर में कव्वाली को कायम रखा। कव्वाली की दुनिया में उनकी कमी को कभी पूरी नहीं किया जा सकता।
- सौभाग्य वर्धन, संगीत प्रोफेसर, चंडीगढ़
अमजद साबरी जैसे मशहूर कव्वाल की मौत से कव्वाल जगत को काफी नुक्सान पहुंचा है। उनकी कव्वाली ताजदार ए हरम को मैं हमेशा सुनता हूं। उनकी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता।
- जगीर सिंह (फोक सिंगर)
अमजद साबरी सुफियाना गायकी केलिए जाने जाते थे। वे ऐसी शख्सियत थें जिनका कव्वाली जगत में हमेशा नाम रहेगा।
- बर्कत अली(कव्वाल)
साबरी जी ने कव्वाली को नए आयामों तक पहुंचाया है। आज भले ही वे इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनकी कला हमेशा जीवित रहेगी।
- एस के सागर(कव्वाल)