पंजाब यूनिवर्सिटी ने एक विधवा मां को फैमिली पेंशन व अन्य लाभ इसलिए जारी नहीं किए, क्योंकि उसके बेटे से लीज का विवाद चल रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में पीयू की अपील पर उसको जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आपको (पीयू को) ऐसे बर्ताव के लिए शर्म आनी चाहिए। इसके पश्चात उस पर 1 लाख जुर्माना लगा दिया। बाद में पीयू के वकील ने याचिका वापस ले ली, फिर जुर्माना राशि हटा दी गई। मामला 2005 का है। सुदेश गुलाटी के बेटे ने पीयू में एक दुकान 3 साल की लीज पर ली थी।
इसकी श्योरिटी सुदेश गुलाटी के पति पीयू में असिस्टेंट रजिस्ट्रार गिरीश कुमार गुलाटी ने भरी थी। इसके बाद भुगतान में कुछ अनियमितता रही। लीज खत्म होने के बाद भी गुलाटी के बेटे ने दुकान खाली नहीं की। गिरीश गुलाटी का अप्रैल 2016 में निधन हो गया। पीयू ने उनकी पत्नी सुदेश गुलाटी की पेंशन व अन्य लाभ रोक दिए। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि बेटे की दुकान के लिए श्योरिटी 3 साल के लिए दी गई थी और उसके बाद कब्जा अवैध था इसलिए इस श्योरिटी को आधार बना पीयू पेंशन व अन्य लाभ नहीं रोक सकती।
कोर्ट ने पीयू को दो माह में सभी लाभ जारी करने के आदेश दिए थे। सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ पीयू ने खंडपीठ के समक्ष याचिका दाखिल कर दी। याचिका सुनवाई के लिए पहुंची तो हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पीयू को जमकर खरी-खोटी सुनाई। हाईकोर्ट ने कहा कि पीयू को इस प्रकार के काम करते हुए शर्म आानी चाहिए। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर एक लाख का जुर्माना लगा दिया। लेकिन पीयू के वकील ने कहा कि वह याचिका वापस लेना चाहते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने याचिका वापिस लेने की छूट देते हुए जुर्माना हटा दिया।