देश में भले ही कोई पॉलिसी शिक्षण संस्थानों में लागू हो, लेकिन पीयू में वह बहुत देरी से लागू होती है। इसी में शामिल है डेंटल कॉलेज के शिक्षकों का प्रमोशन। 35 शिक्षकों के प्रमोशन 13 साल से अटके हुए हैं। अब जाकर पीयू को यह याद आई और इनके लिए प्रमोशन पॉलिसी बनाना शुरू किया है। वर्ष 2006 में पीयू ने अपना विस्तार किया और डेंटल कॉलेज की स्थापना की।
यहां विद्यार्थियों को पढ़ाने के अलावा रोगियों को देखने के लिए भी सुविधा की गई। पूरा ढांचा तैयार किया गया और प्रोजेक्ट धरातल पर उतार दिया गया। यह प्रोजेक्ट लगातार पीयू को ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक हुआ। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी देश-दुनिया में जॉब कर रहे हैं। हजारों रोगियों को भी इलाज मुहैया कराया गया।
इन सभी का श्रेय संस्थान के शिक्षकों को जाता है। इनकी संख्या 35 से अधिक है, लेकिन इन शिक्षकों को उनका हक नहीं मिल पाया। उन्हें प्रमोशन दिए जाने थे। कई बार मांग की गई, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। इससे शिक्षकों का भी मनोबल गिरा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वह अपनी मांग करते रहे।
आखिर में सिंडिकेट में यह प्रस्ताव लाया गया तो प्रमोशन पॉलिसी अब बनना शुरू हुई है। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में भी दो से तीन माह लगा दिए जाएंगे।