उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वह स्पष्ट करें कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिया गया फैसला बहिबल कलां, बरगाड़ी और कोटकपूरा गोलीकांड के सभी मामलों से संबंधित है या नहीं क्योंकि ये सभी अलग-अलग केस हैं। अमन अरोड़ा जब बोल रहे थे तो उस समय अकाली दल (बादल) के विधायक जोरदार नारेबाजी कर रहे थे। अमन अरोड़ा ने कहा कि अकाली इस मामले के बारे में बात सुनने के लिए भी तैयार नहीं हैं जबकि यह मसला श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के साथ जुड़ा हुआ है।
अब एसआईटी को जांच करने में नहीं आएगी रुकावट: अतुल नंदा
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की विस्तार में जानकारी देते हुए एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने बताया कि जज ने कानून के सवाल को खुला रखते हुए देरी के आधार पर सीबीआई की एसएलपी को खारिज कर दिया। नंदा ने कहा कि सीबीआई से राज्य पुलिस को जांच सौंपने के कार्य को अंतिम रूप मिल गया है। इस कारण अब एसआईटी को जांच करने में कोई रुकावट नहीं आएगी।
ऐसे पहुंचा सुप्रीम कोर्ट तक मामला
बेअदबी के मामले में पंजाब पुलिस द्वारा शुरुआत में तीन एफआईआर दर्ज की गई थीं। बाद में जांच का जिम्मा पंजाब पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया गया था जहां दोबारा 13 नवंबर 2015 को तीन केस दर्ज किए गए। उधर, सीबीआई द्वारा इन तीन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी गई लेकिन पंजाब सरकार को अधिकृत प्रयोग के लिए इसकी कॉपी नहीं दी गई। एजेंसी ने यह दलील दी की इसकी नए सिरे से जांच की जाएगी और सीबीआई पंजाब सरकार को समय-समय पर जांच संबंधी जानकारी देती रहेगी।
वहीं, राज्य सरकार ने कहा कि पंजाब विधानसभा द्वारा सीबीआई से जांच वापस लेने संबंधी प्रस्ताव पास किया गया है। इसके अनुसार पंजाब सरकार द्वारा मामले की जांच सीबीआई को देने की सहमति को वापस लेने का नोटिफिकेशन 6 सितंबर, 2018 को जारी किया गया। इस प्रस्ताव और नोटिफिकेशन को एजेंसी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इस पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए नोटिफिकेशन को कायम रखा था। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि सीबीआई ने सहमति वापस लेने के बाद एसएलपी दायर नहीं की थी और राज्य को मामलों की जांच करने का पूरा अधिकार है।