सरकार ने सबसे पहले इस बिल को पर्यटन (आतिथ्य) विभाग को भेजा, जिसने राजभवन के कार्यक्रमों को लेकर कोई प्रावधान न होने की बात कही और साथ ही इस पत्र को वित्त विभाग को फारवर्ड कर दिया। वित्त विभाग की खर्च संबंधी शाखा ने भी 8,31,841 रुपये के बिल के भुगतान पर असमर्थता जता दी। इस तरह रामकथा के कार्यक्रम के खर्च की फाइल दो महीने तक एक से दूसरे विभाग में घूमती रही।
चूंकि मामला राजभवन और राज्यपाल से जुड़ा है, इसलिए सरकार सीधे इन्कार करने से भी बच रही है। जब कोई हल नहीं निकला तब आखिरकार सरकार ने इसे राजभवन को ही लौटाते हुए पूछा है कि यह बताया जाए कि इससे पहले राजभवन में आयोजित ऐसे किसी कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार द्वारा कोई भुगतान किया गया था?
रामकथा के लिए किराये पर लिए सामान का बिल
- राजभवन में एक सप्ताह तक हुए रामकथा के आयोजन के लिए जो सामान किराये पर लिया गया, उसका किराये समेत विवरण भी राजभवन ने प्रदेश सरकार को उपरोक्त पत्र के साथ भेजा है।
- 3528 वर्ग फुट के लिए लाइटों समेत शामियाने का किराया 1,05,840 रुपये
- सिंथेटिक रेड कारपेट 12,400 रुपये
- लाल वूल के प्रिंटेड कारपेट 4,800 रुपये
- 100 बैंक्वेट कुर्सियां 3,000 रुपये
- 100 बैंक्वेट कुर्सियों के कवर 3,000 रुपये
- सनमाइका टॉप वाले 4 कॉफी टेबल 760 रुपये
- 4 थ्री सीटर सोफा 3,520 रुपये
- 13 टू सीटर सोफा 7,670 रुपये
- एक दिन का कुल किराया- 1,40,990 रुपये
- सात दिन का कुल किराया - 9,86,930 रुपये
- कुल रकम पर दी गई छूट - 281980 रुपये
- छूट के बाद कुल रकम - 7,04,950 रुपये
- 18 फीसदी आईजीएसटी - 1,26891 रुपये
- अदा की जाने वाली कुल रकम - 831841 रुपये