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जानिए, पंजाब की राजनीति के 9 समीकरण

Fri, 28 Feb 2014 10:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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दिल्ली में जीत का परचम लहरा कर सबको हैरान करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने पटियाला से डॉ. धरमवीर गांधी को उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी ने वीरवार को जारी लिस्ट में पंजाब का पहला उम्मीदवार घोषित किया है।
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पटियाला सीट पर पिछले तीन लोकसभा चुनाव से कांग्रेस की परनीत कौर जीत हासिल करती आ रही हैं। अकाली दल के उम्मीदवार उन्हें खास टक्कर नहीं दे सके हैं। इस बार भी अकाली दल के पास मजबूत उम्मीदवार का संकट है।

उधर, कांग्रेस इस चुनाव में भी पटियाला को जीती हुई सीट मान कर ही चल रही है। ऐसे में आप ने डॉ. गांधी को उम्मीदवार घोषित कर पटियाला की चुनावी जंग को दिलचस्प बना दिया है।
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त्रिकोणीय होगा मुकाबला

'आप' के मैदान में आ जाने से पटियाला में मुकाबला त्रिकोणीय भी हो सकता है। क्योंकि आप पार्टी के लिए पंजाब में सबसे ज्यादा रुझान पटियाला में देखने को मिला।

कुछ समय पहले आप द्वारा चलाई गई मेंबरशिप मुहिम में सबसे ज्यादा सदस्य पटियाला में बने थे। वहीं, पटियाला से ही सबसे ज्यादा लोगों ने आप के टिकट पर चुनाव लड़ने में दिलचस्पी दिखाई थी।

आप के उम्मीदवार डॉ. गांधी ने दावा किया कि मुहिम के दौरान 80 हजार लोग पार्टी के मेंबर बने थे, जिसमें युवाओं समेत हर वर्ग के लोग शामिल हैं।

हालांकि महिलाओं के लिए रखा टारगेट पूरा नहीं हो सका था। पिछले दिनों पटियाला, समाना, राजपुरा, नाभा और पातड़ां में झाड़ू यात्रा निकाली गई थी। उसे भी काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।

पीपीपी-कांग्रेस के मिले हाथ

लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और पीपीपी के बीच समझौते की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। जानकारी के अनुसार पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत बादल के विदेश दौरे से वापस लौटने के बाद वीरवार को दिल्ली में कांग्रेस के आला नेताओं के साथ बैठकें हुईं।

इसमें बठिंडा लोकसभा सीट मनप्रीत को देने पर सहमति बनी। हालांकि, मनप्रीत की कांग्रेसी नेताओं के साथ बैठकों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो पाई।

लेकिन सूत्र बताते हैं कि समझौता लगभग सिरे चढ़ चुका है। पहले मनप्रीत बादल पीपीपी के लिए दो सीटें मांग रहे थे, लेकिन अंत में बात केवल बठिंडा सीट पर बनी।

हरसिमरत को चुनौती दे सकते हैं मनप्रीत

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस बठिंडा लोकसभा क्षेत्र से मनप्रीत बादल को शिअद प्रत्याशी हरसिमरत बादल के मुकाबले मैदान में उतारना चाहती है। इस बारे में मनप्रीत बादल से संपर्क करने की सभी कोशिशें बेकार गईं।

पीपीपी व कांग्रेस के बीच समझौते की संभावनाओं को यह पहलू और प्रबल करता है कि आज होने वाली साझा मोर्चा की बैठक अब नहीं हो रही है।

मनप्रीत ने बुलाई पीपीपी सेंट्रल कमेटी की बैठक

अब मनप्रीत बादल ने पीपीपी की सेंट्रल कमेटी की बैठक बुला ली है। यह बैठक चंडीगढ़ में होगी। इसमें पार्टी की आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।
माना जा रहा है कि इस बैठक में मनप्रीत बादल नए राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा करते हुए पार्टी नेताओं के सामने सारे पत्ते खोल देंगे। पीपीपी उपाध्यक्ष भगवंत मान ने पुष्टि की कि पार्टी की सेंट्रल कमेटी की बैठक आज होगी।

उन्होंने कांग्रेस के साथ किसी समझौते की जानकारी होने से इंकार किया। अकाली दल लोंगोवाल के सेक्रेटरी जनरल बलदेव सिंह मान ने भी पीपीपी-कांग्रेस समझौते की कोई जानकारी होने से इंकार किया।

सेखों, जाडला लुधियाना से माकपा उम्मीदवार

माकपा के प्रदेश सचिव चरण सिंह विर्दी और भाकपा के प्रदेश सचिव बंत सिंह बराड़ ने कहा कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। अभी तक उनकी मनप्रीत बादल से बात नहीं हुई है।

लोकसभा क्षेत्र लुधियाना से सुखविंदर सिंह सेखों और श्री आनंदपुर साहिब से बलबीर सिंह जाडला माकपा के उम्मीदवार होंगे। माकपा की पंजाब इकाई के सचिव चरण सिंह विर्दी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उम्मीदवारों का फैसला हो गया है, केवल औपचारिक घोषणा होना बाकी है।

साझा मोर्चा के घटक दलों के बीच हुए फैसले के मुताबिक माकपा इन दो, भाकपा फरीदकोट, अमृतसर और फिरोजपुर, पीपीपी जालंधर चंडीगढ़ सहित पंजाब की अन्य छह सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जालंधर सीट सीपीएम (पंजाब) के लिए छोड़ने का फैसला किया गया है।

पीपीपी-अकाली दल लौंगोवाल जाएंगे तीसरे मोर्चे में

पीपीपी, माकपा, भाकपा और अकाली दल लौंगोवाल पर आधारित साझा मोर्चा या तो ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगा या फिर राष्ट्रीय स्तर पर बने तीसरे मोर्चे में शामिल होगा। माकपा और भाकपा पहले ही तीसरे मोर्चे का हिस्सा बन चुके हैं, जबकि ताजा हालात में पीपीपी और अकाली दल लौंगोवाल के भी इस फ्रंट से जुड़ने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।

‘आप’ और बसपा के साथ चुनावी गठबंधन करने की साझा मोर्चा की कोशिशें सिरे नहीं चढ़ पाई हैं। पीपीपी के कांग्रेस के साथ जाने की बात भी अभी अधर में ही है। अहम बात यह है कि कांग्रेस से समझौते को लेकर पीपीपी के भीतर ही मतभेद हैं।

माकपा-भाकपा नहीं होंगे शामिल

इससे भी बढ़कर यदि पीपीपी का समझौता कांग्रेस के साथ हो भी जाता है, तो माकपा और भाकपा राष्ट्रीय स्तर के समीकरणों की वजह से कतई इस गठबंधन का हिस्सा नहीं होंगे।

रही बात अकाली दल लौंगोवाल की तो उसके लिए भी यह निर्णय बहुत मुश्किल होगा, क्योंकि पार्टी प्रमुख और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला ने अन्य अकाली नेताओं सहित कांग्रेस के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है।

ऐसे में उनके लिए कांग्रेस का हाथ थामना आसान नहीं होगा। ‘आप’ नेता पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह किसी भी दल के साथ चुनावी गठबंधन नहीं करेंगे। ‘आप’ के साथ गठबंधन की पीपीपी उपाध्यक्ष भगवंत मान की कोशिशों का भी ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका है।

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साझा मोर्चा बिखरेगा

ऐसे में साझा मोर्चा या तो बिखर जाएगा या फिर थर्ड फ्रंट का हाथ थामेगा। इस संबंध में पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत बादल से संपर्क करने की सभी कोशिशें बेकार गईं, जबकि भगवंत मान ने कहा कि उन्होंने कुछ अच्छे लोगों को एक मंच पर लाने की कोशिश शुरू की है, जल्द ही स्थिति साफ हो जाएगी।

अकाली दल लौंगोवाल के सेक्रेटरी जनरल बलदेव सिंह मान ने कहा कि साझा मोर्चा के सभी घटक दलों का एक ही निर्णय होगा। जिसके साथ भी समझौता किया जाना है, इकट्ठे किया जाएगा। बलदेव मान की इस बात से तीसरे मोर्चे को पीपीपी और अकाली दल लौंगोवाल के रूप में दो नए साथी मिलने की संभावनाएं पैदा हो गई हैं।

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