पंजाब पुलिस का हर सिपाही अपने सेवाकाल में इंस्पेक्टर बनने के बाद रिटायर हो सकता है। विभाग ने सभी कर्मचारियों को नियमित अंतराल पर प्रमोशन देने संबंधी एक प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास पहुंच चुका है, जिस पर जनवरी माह में फैसला लिया जा सकता है। इस तरह नए साल में पुलिसकर्मियों को यह खुशखबरी मिल सकती है।
पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रमोशन की मौजूदा व्यवस्था के तहत कर्मचारी के लिए टेस्ट पास करना अनिवार्य है। हालांकि यह व्यवस्था भी लागू रहेगी, लेकिन ऐसे कर्मचारी जो प्रमोशन टेस्ट क्लीयर नहीं कर पाते या फिर टेस्ट देते ही नहीं हैं, उन्हें अपने सेवाकाल के दौरान प्रमोशन नहीं मिल पाता। ऐसे कर्मचारियों में कार्य के प्रति उदासीनता और मानसिक अवसाद पैदा होने लगता है। इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने कर्मचारियों को नियमित अवधि पर प्रमोट कर उनका उत्साहवर्धन करने का फैसला लिया है।
नौकरी के 16 साल बाद पहला प्रमोशन
सरकार को प्रमोशन का जो प्रस्ताव भेजा गया है, उसके तहत सिपाही को 16 साल की नौकरी पर हेडकांस्टेबल, फिर 24वें साल में एएसआई, 30 वें साल में एसआई और 35वें साल में इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट किया जाएगा। प्रस्ताव में प्रमोशन की इस व्यवस्था में पात्रता की एकमात्र शर्त यह है कि संबंधित कर्मचारी का पूरा सेवाकाल बेदाग होना चाहिए। भ्रष्टाचार या किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में आरोपी या दोषी को प्रमोशन का लाभ नहीं मिल सकेगा।
सर्विस के तीन साल पर प्रमोशन टेस्ट की है व्यवस्था
पंजाब पुलिस
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कानूनी राय के बाद प्रस्ताव सरकार को भेजा
यह भी पता चला है कि पुलिस विभाग ने यह प्रस्ताव कानूनी राय लेकर संशोधन के बाद राज्य सरकार को भेजा है। पहले इस प्रस्ताव में, नियमित अंतराल पर प्रमोशन का खाका तो खींच लिया गया था लेकिन यह व्यवस्था कर दी गई थी कि कर्मचारी को इन प्रमोशनों में वेतन का लाभ नहीं मिलेगा।
बाद में, इस विषय पर विभाग ने कानूनी राय ली, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के वह फैसला सामने आया कि कर्मचारी को उसके पद के अनुसार वेतन दिया जाए। इस आधार पर विभाग ने अपने प्रस्ताव में नियमित प्रमोशन के साथ ही कर्मचारी को उसके नए पद के अनुसार वेतनमान का भी प्रावधान किया है।
सर्विस के तीन साल पर प्रमोशन टेस्ट की है व्यवस्था
पुलिस विभाग में फिलहाल सर्विस के तीन साल पर प्रमोशन के लिए टेस्ट देने की व्यवस्था है। टेस्ट पास करने वालों को छठे साल प्रमोशन मिल जाता है। लेकिन इस टेस्ट में काफी संख्या में कर्मचारी पास नहीं हो पाते, जिससे उनका प्रमोशन का सपना अधूरा रह जाता है। ऐसे कर्मचारियों को लंबी अवधि के बाद उनके कामकाज के आधार पर ही कोई प्रमोशन मिल पाता है। इस तरह भारी संख्या में कर्मचारी उसी पद पर काम करते हुए रिटायर हो जाते हैं जिस पर वे भर्ती हुए थे।