पहले पंजाब पुलिस खुफिया मुख्यालय और अब सरहद के पास स्थित पुलिस थाने पर आरपीजी हमले में भले ही किसी तरह का कोई जानी नुकसान नहीं हुआ लेकिन सुरक्षा माहिरों के अनुसार, इस सबके पीछे पुलिस का मनोबल तोड़ने की कोशिश है। यह बात खुद डीजीपी गौरव यादव भी मानते हैं कि गत समय में पंजाब पुलिस ने पाकिस्तान के हर आतंकी मंसूबे फेल किए हैं। ऐसे में तरनतारन का यह हमला पाकिस्तान की बौखलाहट का नतीजा है।
सात महीने पहले 9 मई को मोहाली के सेक्टर-77 स्थित पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर हुए हमले और तरनतारन में पुलिस थाने पर हमले में कई समानताएं हैं। पुलिस मुख्यालय पर हमला रात करीब पौने आठ बजे उस समय हुआ था, जब वहां पर स्टाफ को छुट्टी हो चुकी थी। इमारत में सुरक्षा कर्मियों के अलावा कोई नहीं था। इसी तरह तरनतारन में थाने पर हुआ हमला रात साढ़े 11 बजे हुआ है। वहीं, आरोपियों ने थाने के सांझ केंद्र को निशाना बनाया। सांझ केंद्र में भी सुबह 9:00 से 5:00 बजे तक मुलाजिम काम करते हैं। साथ ही लोगों का आना-जाना लगा रहता है। हालांकि इस हमले से आतंकी केवल माहौल बिगाड़ने में लगे हुए हैं। याद रहे कि पंजाब पुलिस जनवरी से लेकर अब तक आतंक के सात से मॉड्यूल का पर्दाफाश कर चुकी है। साथ ही कई आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
डीजीपी फील्ड में जाकर मुलाजिमों में भर रहे थे जोश
जैसे ही पंजाब पुलिस के मुख्यालय पर हमला हुआ था, उस समय यह साफ हो गया था कि पाक की खुफिया एजेंसी, आतंकी और गैंगस्टरों का गठजोड़ हो गया है। ये लोग मिलकर पंजाब पुलिस का मनोबल तोड़ने में लगे हैं। इसके बाद जैसे ही गौरव यादव ने डीजीपी के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी, वह खुद फील्ड में सक्रिय हो गए थे। साथ ही मुलाजिमों से मुलाकात करते थे। उन्हें जन्मदिन पर शुभकामनाएं संदेश भेजते थे। इससे मुलाजिम खुद को खुश महसूस करते थे।
सभी थानों में तैनात स्टाफ को हथियारों की ट्रेनिंग दी
इससे पहले पंजाब पुलिस की तरफ से सभी थानों में तैनात स्टाफ के लिए हथियारों की जरूरी ट्रेनिंग दिलवाई गई थी। नवंबर में सीमावर्ती जिले गुरदासपुर से लेकर मोहाली तक स्टाफ को अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई और मॉक ड्रिल करवाई गई। इसके अलावा दंगों में निपटने के तरीके भी बताए गए थे।