फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरियाणा में लागू नहीं होगा पंजाब समान वेतनमान, सरकार ने खारिज की मांग

Sun, 21 Jul 2019 01:45 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
विज्ञापन
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

हरियाणा सरकार सूबे के सरकारी कर्मचारियों को पंजाब समान वेतनमान नहीं देगी। प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार का मानना है कि कर्मचारियों की ये मांग उनके हित में नहीं है और पूरे अध्ययन के बाद ही सरकार ने ये निर्णय लिया है। 

विज्ञापन


सीएम मनोहर लाल ने साफ कहा कि अब इस चैप्टर को पूरी तरह खत्म समझा जाए। सीएम ने कहा कि  हरियाणा के तमाम कर्मचारी प्रदेश को विकास और तरक्की की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी भागेदारी सुनिश्चित करे और सरकार भी कर्मचारियों को आश्वस्त करती है कि उनके हितों की सदैव रक्षा की जाएगी।

कर्मचारियों ने बैठक में सीएम को वर्ष 2014 का भाजपा का घोषणापत्र याद दिलवाते हुए कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले अपनी घोषणा पत्र में ये वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों को पंजाब समान वेतनमान दिया जाएगा। इस पर सीएम ने कहा कि उस वक्त उन्हे इस बात की तकनीकी जानकारी नहीं थी। लेकिन सरकार इस मांग को भूली नहीं थी।
विज्ञापन


सरकार ने इस मसले पर पूरा अध्ययन करवाया, जिसमें ये सामने आया कि पंजाब में आज भी अधिकतर विभागों के कर्मचारी ऐसे हैं, जो हरियाणा की तुलना में कम वेतनमान ले रहे हैं। पंजाब में कुछेक ही विभाग व कर्मचारियों की श्रेणियां ऐसी हैं, जिनका वेतन हरियाणा की अपेक्षाकृत अधिक है। 

लेकिन यदि हम हरियाणा में पंजाब समान वेतनमान लागू करते हैं, तो सभी विभागों में इसे लागू करना पड़ेगा, जिससे हरियाणा केअधिकतर कर्मचारियों को नुकसान होगा और ये बात कर्मचारी कतई स्वीकार नहीं करेंगे। इसलिए इस विषय को सरकार ने ड्राप कर दिया है। सीएम ने दावा किया कि आज भी हरियाणा पंजाब से कई चीजों में बहुत आगे है और सातवा वेतनमान लागू करने वाला देश का पहला राज्य भी बना है।

वर्ष 2011 के बाद के कच्चे कर्मचारी पक्के नहीं होंगे, मगर रोजगार बरकरार रहेगा
सीएम ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्ष 2011 के बाद के कच्चे कर्मचारी नियमित नहीं होंगे। उनसे किसी न किसी रूप में काम लिया जाता रहेगा और यह कोशिश रहेगी कि उनका रोजगार बराकरार रहे। सीएम ने कहा कि कोर्ट में भी यह माना है कि कच्चे कर्मचारी कच्चे ही है, उन्हें अधिकृत पदों पर नहीं रखा गया है और कहीं न कहीं ये कर्मचारी पूर्व सरकारों की ‘बैक डोर एंट्री’ जैसा है। 

सीएम के अनुसार पूर्व सरकारों ने  वर्ष 1993, 1996, 2003,  2011 व 2014 में रेगुलराइजेशन पॉलिसी बनाई। लेकिन हमने वर्ष 2014  की रेगुलराइजेशन पॉलिसी को रद करते हुए रिक्त पदों पर पक्की भर्तियां करने का संकल्प लिया। इसलिए वर्ष 2011 से पहले के ही कच्चे कर्मचारी पक्केहोंगे, उसके बाद के नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें