कोरोना काल में भी पीजीआई इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में आने वाले मरीजों की संख्या कम नहीं हुई है। अप्रैल से जुलाई के बीच इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में 10,000 से ज्यादा गंभीर मरीजों का इलाज किया जा चुका है। इनमें लगभग 8000 चंडीगढ़ से बाहर के मरीज शामिल हैं, जबकि अकेले पंजाब के 5000 से अधिक गंभीर मरीजों को जीवनदान मिला है।
इसके अलावा हरियाणा, हिमाचल, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश व अन्य प्रदेशों के मरीज शामिल हैं। पीजीआई प्रशासन ने बाहरी मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए इमरजेंसी के साथ ट्रॉमा में व्यवस्था मजबूत की है। पीजीआई प्रशासन का कहना है कि ज्यादातर रेफर मरीजों की स्थिति बेहद गंभीर होती है। कोरोना से बचाव के लिए मरीजों की कोरोना रिपोर्ट को जरूरी कर दिया गया है ताकि उन्हें तत्काल इलाज दिया जा सके।
बाहरी मरीजों का दबाव ज्यादा
पीजीआई की इमरजेंसी, ट्रॉमा और पीडियाट्रिक इमरजेंसी में 4 महीनों में देखे गए मरीजों का आंकड़ा इसकी पुष्टि करता है कि पंजाब के अलावा हरियाणा और हिमाचल के मरीजों की संख्या चंडीगढ़ की तुलना में काफी ज्यादा रही है। कोरोना से बचाव के तमाम उपायों के बावजूद इमरजेंसी और ट्रामा में दूसरे प्रदेशों से आने वाले मरीजों से सबसे ज्यादा पीजीआई के डॉक्टर व स्टाफ संक्रमित हुए हैं। वहीं, मरीजों का दबाव काफी तेजी से बढ़ रहा है। पीजीआई प्रशासन ने गंभीर मरीजों की स्थिति खतरे से बाहर होने के बाद उन्हें वापस भेजना शुरू कर दिया है।
पीडियाट्रिक इमरजेंसी में भी आंकड़ा बढ़ा
पीडियाट्रिक इमरजेंसी में भी सबसे ज्यादा पंजाब के गंभीर बच्चों को इलाज मिला है। इसमें अप्रैल से जुलाई के बीच लगभग 1900 बच्चों का इलाज किया गया। यह संख्या चंडीगढ़ के अलावा अन्य प्रदेशों से आने वाले मरीजों की तुलना में सबसे ज्यादा रही है।