सेना में भी दुश्मनों के छुड़ाए थे छक्के
मुक्केबाजी से पहले कौर सिंह ने सेना में रहकर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। गोल्ड मेडलिस्ट सूबेदार कौर सिंह 1970 में फौज में भर्ती हुए थे। 1971 के युद्ध में भी उन्होंने अपने जौहर दिखाए। भारतीय फौज में शानदार सेवाओं के लिए वर्ष 1988 में उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।
कौर ने कहा था- अली के मुक्के दमदार
27 जनवरी, 1980 में कौर सिंह ने दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में चार राउंड के एक प्रदर्शनी मैच में मोहम्मद अली के खिलाफ रिंग में उतरे। इस मुकाबले के बाद कौर सिंह ने कहा था कि अली के मुक्के बहुत दमदार थे। उनके मुताबिक अली का प्रसिद्ध जैब स्पष्ट रूप से याद है। उसकी गति अद्भुत थी। चार राउंड के खेल में एक बार भी उनकी गति कम नहीं हुई। वह कद में मुझसे छोटे थे लेकिन फुर्ती के कारण वह मेरी पहुंच से बाहर हो गए।
जोरदार पंच और फुर्ती के लिए जाने जाते थे
कौर सिंह के भाई अमरजीत सिंह ने बताया कि कौर सिंह अपने जोरदार पंच और फुर्ती के लिए जाने जाते थे। यही कारण था कि बड़े खिलाड़ी भी उनके सामने नहीं टिक पाते थे। वह शांत स्वभाव के थे लेकिन रिंग में उतरते ही उनका शांत स्वभाव बदल जाता था। उनके दो बेटे और एक बेटी है। एक बेटा फौज में है।
स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल जीवनी, फिल्म भी बनी
पंजाब सरकार ने हाल में उनकी जीवनी स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल की है। उन पर एक फिल्म भी बन चुकी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने शोक संदेश में कहा कि कौर सिंह का जीवन उभरते खिलाड़ियों को सख्त मेहनत के लिए प्रेरित करेगा।
गांव में हुआ अंतिम संस्कार, जल्द बनेगा स्मारक
कौर सिंह का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव खनाल खुर्द में पूरे सम्मान के साथ किया गया। 152 सिख रेजिमेंट के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी। कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने उन्हें श्रद्धासुमन भेंट किए। उन्होंने कहा कि जल्द ही कौर सिंह की याद में स्मारक का निर्माण किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी इस महान शख्सियत के जीवन से दिशा लेकर खेलों से जुड़े।