शुक्रवार को पुलिस के सख्त पहले में सुबह नौ बजे मतदान शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक चला। करीब छह बजे परविंदर कौर को विजेता घोषित कर दिया गया। परविंदर कौर ने करीब 147 वोटों से जीत दर्ज की। वहीं, उनके विरोधी पूर्व प्रधान गिल सिर्फ 12 वोट ही मिले। 7 वोट रद्द कर दिए गए।
परविंदर कौर बंगा मूल रूप से होशियारपुर की हैं। शाम को छह बजे जैसे ही परविंदर कौर बंगा के जीत की घोषणा हुई तो कुछ क्षण बाद ही पंजाब के एनआरआई मामलों के मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल, सांसद सुशील रिंकू, पंजाब वेयर हाउस कारपोरेशन की चेयरपर्सन राजविंदर कौर थियाड़ा व नकोदर की विधायक इंदरजीत कौर मान एनआरआई सभा के कार्यालय पहुंचे और परविंदर कौर बंगा को बधाई दी।
शांतिमय ढंग से चुनाव हुए, धक्केशाही का सवाल ही नहीं: धालीवाल
मंत्री कुलदीप धालीवाल ने एनआरआई भवन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सभा के चुनाव काफी शांतिमय व नियमानुसार हुए हैं, इसमें धक्केशाही का सवाल ही नहीं है।
एनआरआई की समस्याओं का समाधान करवाना प्राथमिकता: बंगा
परविंदर कौर बंगा ने जीत के बाद कहा कि उनकी प्राथमिकता एनआरआई की समस्याओं का समाधान करवाने की होगी। एनआरआई को सरकारी कार्यालयों व जमीन जायदाद के मामलों में परेशानी न हो, यह यकीनी बनाया जाएगा।
2010 में हुए थे पहले चुनाव, अब तक बने 7 प्रधान
शिअद सरकार के दौरान एनआरआई सभा का गठन किया गया था। सभा में डिवीजनल कमिश्नर से लेकर एडीसी और सीएम को भी पैटर्न की जिम्मेदारी दी जाती है। सभा के शुरुआती वर्षों में सर्वसम्मति के साथ ही प्रधान नियुक्त होते रहे लेकिन 2010 में पहली बार चुनाव करवाए गए थे।
जबकि, पहले प्रधान एडवोकेट प्रेम सिंह 1997 से 2000, ज्ञानी रेशम सिंह 2002 तक, प्रीतम सिंह नारंगपुर 2002 से 2004 तक, ज्ञानी रेशम सिंह हेयर 2006 से 2008 तक, कमलजीत सिंह हेयर 2008 से 2010 तक सर्वसम्मति से प्रधान बन चुके हैं। 2013 से 2015 तक जसबीर सिंह गिल, 2020 से 2022 तक किरपाल सिंह सिहोता प्रधान रहे।