पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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गर्भवती, 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों की माताएं और उम्रदराज व गंभीर बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों को कोरोनावायरस से अधिक खतरा है। पंजाब सरकार ने ऐसे लोगों को ऑफिस न बुलाने का निर्णय लिया है। यह जानकारी याचिकाकर्ता को पंजाब सरकार द्वारा एक पत्र के माध्यम से दी गई है।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय को बताया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 30 मई 2020 को कोरोना वायरस के चलते कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि गर्भवती महिलाओं, 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मां और उम्र दराज तथा गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग तब तक घर से बाहर न निकलें, जब तक कि मेडिकल इमरजेंसी या बेहद जरूरी काम न हो। केंद्र सरकार के अनुसार इन लोगों को कोरोना वायरस से अधिक खतरा होता है, इसलिए यह दिशा-निर्देश जारी जारी किए गए थे।
याचिकाकर्ता ने बताया कि पंजाब सरकार अपने सभी कर्मचारियों को कार्यालय में बुला रही है, जिनमें इस तरह के कर्मचारी भी शामिल हैं। यह केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस संबंध में उसने पंजाब सरकार को मांगपत्र भी सौंपा था लेकिन उस पर कोई फैसला नहीं लिया गया।
उच्च न्यायालय ने मुख्य याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में याचिकाकर्ता के मांगपत्र पर पंजाब सरकार को जल्द से जल्द निर्णय लेने के आदेश दिए थे। आदेश का पालन न होने पर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता का मांगपत्र अभी भी पंजाब सरकार के पास लंबित है। इसलिए यह अवमानना का मामला नहीं बनता। इस दौरान पंजाब सरकार ने उच्च न्यायालय को विश्वास दिलाया था कि इस बारे में जल्द से जल्द निर्णय ले लिया जाएगा।